नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह ने हड़ताली पायलटों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने विमानन नियामक डीजीसीए से उन पायलटों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है जो स्वस्थ होने के बावजूद बीमारी का बहाना कर काम पर नहीं आ रहे हैं। आठ दिनों से अघोषित हड़ताल पर गए ऐसे पायलटों की तादाद तकरीब 200 है। इनमें से 71 को एयर इंडिया प्रबंधन बर्खास्त कर चुका है।

अजित के सख्त रुख के बाद पर एयर इंडिया ने दिल्ली के 53 में से 48 पायलटों के घर डॉक्टरों की टीमें भेजी थीं, लेकिन उनके घरों पर ताले पड़े मिले। उनके मोबाइल भी 'नॉट रीचेबल' थे। सिर्फ पांच पायलट ही इन टीमों को मिल पाए, उन्हें जांच में स्वस्थ पाया गया। ये भी पेट दर्द या उल्टी-दस्त, बदनदर्द जैसी दूसरी दिक्कतों का बहाना कर रहे थे।

इसके अलावा मुंबई और दूसरे केंद्रों के 18 पायलट राजधानी के हयात होटल में ठहरे हुए थे। इनमें से 9 ने भी विभिन्न बीमारियों का बहाना बनाया। इन्हें भी डॉक्टरों ने प्राय: स्वस्थ पाया। अजित ने कहा, 'पायलट बहाना बना रहे हैं, यह तो हमें पहले दिन से पता है। आइपीजी ने कहा भी था कि कल और लोग बीमार हो जाएंगे।'

आपात योजना से उड़ानों में सुधार

-एयरलाइन की सात कर्मचारी यूनियनों ने किया मध्यस्थता का प्रस्ताव

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो: एयर इंडिया के पायलटों की हड़ताल के आठवें दिन एयर इंडिया की सिर्फ 10 उड़ानें ही रद हुई। ऐसा आपात योजना के लागू होने और एक्जीक्यूटिव पायलटों के मोर्चे पर उतरने से संभव हुआ। इससे इंडियन पायलट गिल्ड [आइपीजी] के हड़ताली पायलटों पर दबाव बढ़ गया है। आइपीजी की कमजोर होती स्थिति को देखते हुए एयर इंडिया कर्मचारियों से जुड़ी सात यूनियनों ने सरकार, प्रबंधन और पायलटों के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव कर दिया है।

इस दौरान एयर इंडिया 200 हड़ताली पायलटों में से अब तक 71 को बर्खास्त कर चुकी है। बुधवार को स्थिति में और सुधार होने की संभावना है। हड़ताल में मध्यस्थता करने की पेशकश करने वालों में इंजीनियरों, केबिन क्रू, ग्रांउड स्टाफ व कामर्शियल स्टाफ से संबंधित यूनियनें शामिल हैं।

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