जंगल के रखरखाव और सर्वेक्षण में अब एआई का बढ़ेगा इस्तेमाल, मिलेंगे सटीक आंकड़े
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारतीय वन सर्वेक्षण के साथ मिलकर वनों के बेहतर रखरखाव के लिए एआई तकनीक का उपयोग करेगा।

जंगल के रखरखाव और सर्वेक्षण में अब एआई का बढ़ेगा इस्तेमाल। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
वन सर्वेक्षण में एआई से मिलेंगे अधिक सटीक आंकड़े।
कटाई, अतिक्रमण और आग की वास्तविक समय में निगरानी।
जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मिलेगी मदद।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वनों के सर्वेक्षण से लेकर वन क्षेत्र में होने वाली कटाई और उसके अतिक्रमण व वनों में लगने वाले आग जैसी घटनाओं पर अब एआइ के जरिए पैनी नजर रखी जाएगी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वनों के बेहतर रखरखाव के लिए भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआइ) के साथ मिलकर स्वदेशी क्षमताओं के साथ अब एआई जैसी नवीनतम तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में जुटा है।
माना जा रहा है कि इससे इस्तेमाल से वनों के सर्वेक्षण के अब ज्यादा सटीक आंकड़े मिलेंगे। वन क्षेत्रों में होने वाली कटाई और अतिक्रमण की रीयल टाइम मॉनीटरिंग की जा सकेगा। अभी इसकी निगरानी मैनुअल तरीके से ही होती है।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने यह पहल तब की है, जब जलवायु परिवर्तन की अपनी प्रतिबद्धताओं के तहत भारत ने वर्ष 2035 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के जरिए 3.5 से 4 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड के समतुल्य कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी है, वन क्षेत्रों का रखरखाव और बेहतर किया जाए।
पिछले दिनों इसे लेकर देश भर के वन अधिकारियों की एक राष्ट्रीय कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें वन अमले को एआई जैसी तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया।
मंत्रालय का दावा है कि तकनीक से जुड़ने से वन सर्वेक्षण से जुड़ी त्रुटियां कम होगी, साथ ही इसके सर्वेक्षण में समय भी कम लगेगा। वन क्षेत्रों में होने वाले बदलावों, पौधों की प्रजाति आदि की पहचान में आसानी होगी। गौरतलब है कि 2023 की वन स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक देश में मौजूदा समय में वन क्षेत्र 7.15 लाख वर्ग किमी व हरित क्षेत्र करीब 1.12 लाख वर्ग किमी है। जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है।
एआई से कुछ इस तरह मिलेगी मदद
अभी सैटेलाइट की तस्वीरों को देखकर यह पहचानता पड़ता था कि कौन सा वन क्षेत्र है व कौन खेती की जमीन है। एआई के इस्तेमाल का इसकी तुंरत पहचान हो जाएगी।
साथ ही सघन वनों,खुले वनों व झाड़ियों की भी अलग-अलग पहचान में मदद मिलेगी। इसकी मदद से नई और पुरानी तस्वीरों की तुलना करके यह पता चल जाएगा कि किसी हिस्से में पेडों की कटाई हुई है। साथ ही कहां नए पौधे लगाए गए है। अभी यह काम मैनुअली किया जाता है। इसके चलते इसमें बड़ा खेल भी देखने को मिलता है।
एआई के जरिए वनों की कटाई और अवैध गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकती है। क्योंकि जैसे ही किसी क्षेत्र में वनों के सघनता या पेड गायब दिखेंगे वह तुरंत अलर्ट कर देगा। वहीं मौसम व सूखे आदि की सटीक जानकारी जुटाकर वह आग को लेकर पहले ही अलर्ट जारी सकेगा।
