नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पायलटों, प्रबंधन और सरकार के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने से एयर इंडिया की हड़ताल सातवें दिन भी बदस्तूर जारी रही। हड़ताली पायलटों ने नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह से अकेले मिलने की इच्छा प्रकट की है। वे नहीं चाहते कि एयर इंडिया का कोई व्यक्ति उस दौरान रहे। पायलटों ने सोमवार को अजित से मिलने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। वे उनके घर में कुछ कागजात छोड़कर चले गए। इनमें एयर इंडिया प्रबंधन की वादाखिलाफी के प्रमाण हैं। इस दिन भी एयर इंडिया की 14 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद हुई। दिल्ली, मुंबई में सैकड़ों यात्री भटकते रहे।

पायलट अपनी बात पर अड़े हुए हैं। उन्होंने नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह के उस प्रस्ताव को मानने से इन्कार कर दिया है। इसमें पायलटों से पहले काम पर आने और तब वार्ता की पेशकश की गई थी। पायलटों के रुख पर अजित ने कहा, 'पायलटों ने जो भी मुद्दे उठाए थे, उनका या तो समाधान किया जा चुका है, या उन पर कुछ करना संभव नहीं है। कोर्ट हड़ताल को गैरकानूनी घोषित कर चुका है। इसलिए अब इस हड़ताल का कोई औचित्य नहीं बचा है। वे ऐसे मुद्दों पर अड़े हुए हैं जो अब हैं ही नहीं। पहले वे हड़ताल खत्म करें, तब हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है।' पिछले हफ्ते ही दिल्ली हाई कोर्ट ने हड़ताल को गैरकानूनी घोषित किया था और पायलटों से काम पर लौटने को कहा था।

हड़ताली पायलटों की संस्था इंडियन पायलट गिल्ड [आइपीजी] के कुछ पदाधिकारियों ने विमानन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें कुछ कागजात दिए। इनमें यह साबित करने की कोशिश की गई है कि प्रबंधन ने प्रोन्नति से संबंधित वादों को पूरा करने में हीलाहवाली की है। ये पदाधिकारी बाद में अजित की नामौजूदगी में उनके घर भी पहुंचे और वहां वही कागजात छोड़कर गए। उस समय अजित संसद में थे। पायलटों की मांग है कि विमानन मंत्री अकेले में उनके साथ बैठक करें। अब तक आइपीजी के पदाधिकारियों की मंत्री से प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई बात नहीं हुई है।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप