बम बनाने से कार चुराने तक... AI का हो रहा दुरुपयोग, हूती विद्रोहियों ने मिसाइल बनाने में किया इस्तेमाल
एआई का दुरुपयोग अब साइबर अपराध और डीपफेक से आगे बढ़कर बम बनाने और कार चुराने जैसे गंभीर आपराधिक कार्यों में हो रहा है।

एआई के दुरुपयोग की चेतावनी (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
एआई का दुरुपयोग बम बनाने, कार चुराने जैसे अपराधों में।
हूती विद्रोहियों ने मिसाइल बनाने में एआई मॉडल का उपयोग किया।
ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर से एआई प्रतिबंधों को आसानी से बायपास किया जा रहा।
राजीव कुमार, जागरण। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का गलत इस्तेमाल सिर्फ साइबर क्राइम और डीपफेक वीडियो बनाने तक ही सीमित नहीं रह गया है। इसकी मदद से बम बनाने से लेकर कार चुराने का तरीका आसानी से जाना जा सकता है। यह चलन शुरू भी हो गया है।
भारत में इस्तेमाल होने वाले चैटजीपीटी या ग्रोक जैसे एआई माडल से बम बनाने या कार चुराने के तरीके को पूछने पर वह इसकी जानकारी देने से मना कर देगा। लेकिन कंप्यूटर साइंस का ज्ञान रखने वाला छात्र या कोई व्यक्ति विशेष प्रकार के साफ्टवेयर का इस्तेमाल करके इन एआई माडल से सबकुछ जान सकता है, सीख सकता है।
जानकारों का कहना है कि यह एक खतरनाक ट्रेंड है। कोई भी व्यक्ति एआई से मिलने वाली इस प्रकार की जानकारी का गलत इस्तेमाल करके आपरधिक गतिविधियों को अंजाम दे सकता है।
कंप्यूटर साइंस के जानकारों ने बताया कि बाजार में कई ऐसे ओपन सोर्स साफ्टवेयर उपलब्ध है, जिनके इस्तेमाल से एआई से कोई भी जानकारी आसानी से हासिल की जा सकती है। बुल्गेरियन इंजीनियर द्वारा विकसित लामाडाटसीपीपी ऐसा ही ओपन सोर्स साफ्टवेयर है और इस प्रकार के कई साफ्टवेयर फ्री में उपलब्ध है।
लेकिन इसे अपने लैपटाप में डाउनलोड करके एआई माडल के साथ उसे जोड़ने के लिए कंप्यूटर साइंस की थोड़ी विशेष जानकारी होनी चाहिए। इस बात से इलेक्ट्रानिक्स व आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी वाकिफ है और उनके मुताबिक इस पर ध्यान दिया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि सिर्फ एआई डेवलपर्स और समाज के रक्षक ही एआई के इस प्रकार के गलत इस्तेमाल को रोक सकते हैं।
हाल ही में अमेरिकन एआई कंपनी एंथ्रोपिक्स ने यह खुलासा किया कि हूती विद्रोहियों ने एडवांस मिसाइल बनाने के लिए उनके माडल क्लाउडे का इस्तेमाल किया। एंथ्रोपिक्स को इस बात का पता चलने पर उस आईडी को ब्लाक कर दिया गया। बताया जा रहा है कि हूतियों ने एआई से मिली जानकारी के आधार पर ही मिसाइल बनाने का काम किया।
एंथ्रोपिक्स ने पिछले महीने जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल दिसंबर से लेकर इस साल अगस्त के दौरार हथियार बनाने से लेकर जैविक दुरुपयोग, घोटाला, ठगी व साइबर अपराध करने के लिए उनके एआई माडल से जानकारी ली गई।
एंथ्रोपिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हम इसलिए इन जानकारी को सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि लोगों को पता रहे कि हमारे एआई माडल का क्या-क्या गलत इस्तेमाल हो रहा है। एआई माडल की क्षमता बढ़ने के साथ इस प्रकार के जोखिम भी बढ़ते जाएंगे। एआई डेवलपर्स की रजामंदी से ही इसके दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
