तकनीक और न्यायपालिका पर बोले सीजेआई सूर्यकांत- 'AI केवल मददगार है, वह जजों का विकल्प नहीं बन सकता'
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार को कहा कि न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ...और पढ़ें

एआई अदालतों की मदद कर सकता है, जजों की जगह नहीं ले सकता : सीजेआई
HighLights
सीजेआई ने कहा, न्यायाधीशों के पास ही रहना चाहिए फैसला लेने का काम
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत एआई पर हमारी निर्भरता बढ़ रही है
पीटीआई, नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार को कहा कि न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि एआई के पास जजों की समझदारी या फैसला लेने की क्षमता नहीं आ सकती। यह काम जजों के पास ही रहना चाहिए।
उज्बेकिस्तान के समरकंद में 'एसोसिएशन आफ एशियन कांस्टिट्यूशनल कोर्ट्स' के सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि तकनीक लाखों लोगों तक न्याय पहुंचा सकती है। लेकिन, अगर सही सुरक्षा उपाय न हो, तो यह नागरिकों को इससे दूर भी कर सकती है। इससे लोगों का भरोसा भी कम हो सकता है।
आगे कहा कि जैसे-जैसे डाटा और एआई पर हमारी निर्भरता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इनके इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाले सुरक्षा उपाय भी मजबूत होने चाहिए। उल्लेखनीय है कि जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एआई समिति ने अदालतों में एआई के इस्तेमाल के लिए नियमों का मसौदा जारी किया था।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इंसान की प्रधानता के सिद्धांत पर आधारित ये नियम साफ करते हैं कि एआई न्यायिक शोध में मदद कर सकता है। यह अदालती प्रक्रियाओं में सहयोग दे सकता है। लेकिन, यह कभी भी न्यायिक समझ या फैसले लेने का माध्यम नहीं बन सकता। यह अधिकार हमेशा जज के पास ही रहना चाहिए।
