नई दिल्ली। शनिवार सुबह 8.00 बजे अफजल गुरु को फांसी दे दी गई। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और गृहसचिव आर के सिंह ने पुष्टि की । संसद पर हमले में दोषी आतंकी अजमल को तिहाड़ के तीन नंबर जेल में फांसी दी गई। फांसी के बाद आतंकी अफजल के परिजनों को दिल्ली बुलाया गया। तिहाड़ में ही अफजल को दफनाया गया। पूरी इस्लामिक रीति रिवाज से इसे दफनाया गया।

जब फांसी की खबर चल रही थी उस वक्त आतंकी अफजल की पत्नी तबस्सुम गुरु श्रीनगर के एक नर्सिग होम में ड्यूटी कर रहीं थीं। संसद पर हुए आतंकी हमले के अभियुक्त अफजल गुरू को फांसी पर लटकाए जाने और उसे तिहाड़ जेल में ही दफनाए जाने की जानकारी उसकी पत्‍‌नी को नहीं थी। टेलीविजन चैनलों के माध्यम से उसे अफजल को फांसी दिए जाने की सूचना मिली। यह कहना है कि संसद हमले के आरोप से बरी हो चुके प्रोफेसर एसएआर गिलानी का। गिलानी ने कहा कि उनकी अफजल की पत्‍‌नी तबस्सुम से बात हुई है। तबस्सुम ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका के लिए आवेदन किया था। इस दया याचिका को पिछले तीन फरवरी को निरस्त कर दिया गया। लेकिन इसकी भी जानकारी तबस्सुम को नहीं दी गई। इसके अलावा उसे दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ न्यायिक समीक्षा के लिए आवेदन करने का भी मौका नहीं दिया गया। गिलानी का कहना है कि न केवल तबस्सुम और उसके परिवार वालों की दया याचिका खारिज की गई बल्कि परिवार को अफजल गुरू के अंतिम संस्कार के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया। गिलानी ने कहा अफजल गुरू को फांसी का निर्णय कानून व्यवस्था के हिसाब से नहीं किया गया है बल्कि इस मामले को राजनीतिक तरीके से निपटाया गया है। उधर अफजल गुरु के भाई मुश्ताक अहमद गुरु ने अफजल गुरु का पार्थिव शरीर मांगा है। मुश्ताक ने कहा कि क‌र्फ्यू लगने की वजह से वह एक दूसरे से मिल नहीं पा रहे हैं। कहीं भी जा नहीं सकते हैं। आतंकी अफजल के भाई ने सरकार पर सूचना नहीं देने का आरोप लगाया है। जबकि गृह मंत्रालय ने कहा है कि परिजनों को सूचना दी गई थी।

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