नई दिल्ली। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को आज [शनिवार] सुबह आठ बजे तिहाड़ के तीन नंबर जेल में फांसी दे दी गई। तिहाड़ में मौजूद डाक्टरों ने कुछ ही देर बाद उसको मृत घोषित कर दिया है। इसके बाद उसको पूरे इस्लामिक रीतिरिवाज के साथ नौ बजे जेल में ही दफना दिया गया। राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका को तीन फरवरी को खारिज कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार को गृहमंत्रालय के सभी आला अधिकारियों के बीच बैठक में यह तय हुआ कि उसको शनिवार सुबह फांसी दी जाएगी। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और गृहसचिव आरके सिंह ने अफजल गुरु की फांसी की पुष्टि की है।

जेल प्रशासन के मुताबिक फांसी लगाए जाने से पहले अफजल गुरु शांत था। फांसी की जानकारी के बाद उसने सुबह नमाज पढ़ी थी। इसके बाद डीएम, जेल से जुड़े अधिकारियों, डाक्टरों और एक मौलवी की मौजूदगी में उसको फांसी दी गई।

वर्ष 2001 में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु ने दस वर्ष तिहाड़ की हाई सिक्योरिटी सेल में बिताए थे। फांसी लगाए जाने से पहले उसको सेल से अलग किया गया और उसकी अंतिम इच्छा भी पूछी गई, जिसके बाद जेल के अधिकारियों से उसने कुरान दिए जाने की मांग की थी, जो पूरी कर दी गई। जेल अधिकारियों के मुताबिक अफजल पूरी रात सो नहीं सका और न ही उसने शुक्रवार की रात को खाना ही खाया।

अफजल की फांसी की खबर के बाद उसके परिवार वालों ने उसके शव की मांग की है। उनका आरोप है कि उन्हें यह खबर टीवी के माध्यम से मिली है, केंद्र सरकार की ओर से उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई। जबकि सरकार का कहना है कि उन्होंने दो बार अफजल के परिवार वालों को पत्र भेजकर इसकी सूचना दी थी।

इस बीच खबर यह भी है कि अफजल के परिवारवाले श्रीनगर से दिल्ली के लिए निकल चुके हैं। हालांकि इस मामले में बरी किए गए एसआर गिलानी ने अफजल की फांसी पर नाराजगी जाहिर की है। गिलानी ने इस मामले में निष्पक्ष फैसला न होने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मसले पर कानून प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

अफजल गुरु की फांसी को लेकर तिहाड़ जेल में शनिवार तड़के ही तैयारी शुरू कर दी गई थी। उसको सुबह करीब साढ़े पांच बजे तिहाड़ में फांसी की जगह पर लाया गया था, जिसके बाद उसको आठ बजे फांसी दे दी गई। माना जा रहा है कि इस फांसी से सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपना कड़ा रुख अपनाते हुए पाक को कड़ा संदेश दिया है। गौरतलब है कि अफजल गुरु न सिर्फ आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और जेकेएलएफ से भी जुड़ा हुआ था बल्कि उसने पाक में जाकर आतंकी ट्रेनिंग भी ली थी।

भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भले ही इस फैसले को लेने में देर लगी लेकिन यह फैसला देशहित में लिया गया है जिसका पार्टी समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले ही इसकी मांग कर रही थी। वहीं उज्जवल निकम ने अफजल गुरु की फांसी पर खुशी जताई है। उन्होंने उन लोगों के लिए यह एक कड़ा संदेश जो देश में आतंकवादी गतिविधियां फैला रहे हैं। हालांकि उन्होंने इस फांसी में देरी पर थोड़ा अफसोस जरूर जताया। निकम ने आर्टिकल 17, जिसके तहत राष्ट्रपति किसी दोषी की दया याचिका पर निर्णय लेते हैं, में बदलाव की जरूरत है।

गौरतलब है कि वर्ष 2001 में हुए संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को लेकर भाजपा समेत कई संगठन लगातार उसको जल्द फांसी देने की मांग कर रहे थे। उसको सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में हमले का दोषी मानते हुए फांसी की सजा दी थी। उसकी दया याचिका को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल निलंबित रखा था। इसके बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी उसकी फाइल को एक बार फिर से गृहमंत्रालय को वापस भेजा गया था। लेकिन शुक्रवार को राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका को खारिज कर उसकी फांसी पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद ही गृहमंत्रालय की बैठक में उसकी फांसी को लेकर तैयारी की शुरुआत कर दी गई।

इससे पहले गृहमंत्री ने विपक्ष की मांग पर कहा था कि वह इस मामले में सही समय आने पर ही कोई फैसला लेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को भी फांसी दे चुकी है। ठीक उसी तर्ज पर आज गुरू को भी फांसी दी गई। अफजल गुरु की फांसी को देखते हुए कई जगहों पर क‌र्फ्यू के साथ हाई अलर्ट रखा गया है।

अफजल गुरु तिहाड़ में 16 गुणा 12 की सेल में रखा गया था। जहां आज सुबह उसको फांसी दी गई थी वह जगह महज उसकी सेल से 25 मीटर की दूरी पर है। दिसंबर 2001 में संसद हमले के बाद उसको 12 दिसंबर 2001 को गिरफ्तार किया गया था। जहां से उसको गिरफ्तार किया गया था वहां से काफी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया गया था। तिहाड़ का जेल नंबर तीन को हाई सिक्योरिटी जेल है। यहां पर खूंखार कैदियों या आतंकियों को रखा गया है।

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