8 सितंबर को मुलाकात और हफ्ते भर में समाधान... BJP विधायक ने वापस की पीएम मोदी के दोस्त को उनकी जमीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के साथी असगर अली वोरा को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की कंस्ट्रक्शन कंपनी से उनकी जमीन वापस मिल गई है।

पीएम मोदी से मुलाकात करते हुए उनके बचपन के दोस्त असगर अली वोरा।
डिजिटल डेस्क, भायंदर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के साथी असगर अली वोरा को उनकी जमीन वापस मिल गई है। मीरा रोड के रहने वाले 81 साल वोरा ने पीएम मोदी से मिलकर आरोप लगाया था कि बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भयांदर में उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है।
इसके कुछ दिनों बाद मंगलवार को नेता ने कहा कि वह विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं और उस प्लॉट के लिए मिली कंस्ट्रक्शन की मंजूरी भी सरेंडर कर रहे हैं। मेहता ने यह भी कहा कि वह उस बुज़ुर्ग असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई अपनी शिकायत वापस ले रहे हैं। वोरा ने गुजरात के वडनगर के बी एन स्कूल में मोदी के साथ पढ़ाई की थी।
बीजेपी विधायक ने किया था जमीन पर कब्जा
वोरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और इस विवाद में उनके दखल की मांग की। उन्होंने बताया कि 1989 में उन्होंने भयंदर ईस्ट के नवघर में लगभग 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी लेकिन 2011 में उस प्लॉट पर स्वयं बिल्डर्स और मेहता की सेवन-इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने कब्जा कर लिया।
वोरा ने कहा कि वह लगभग 15 सालों से अलग-अलग सरकारी अधिकारियों के साथ इस मामले को लेकर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात में उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अधिकारियों का एक्शन
मुलाकात के बाद सरकारी अधिकारियों ने इस मामले पर कार्रवाई शुरू की। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने एक बैठक बुलाई। इस बैठक में वोरा, मेहता, मीरा-भयंदर नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए।
बैठक के दौरान मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया कि वह विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं और मिली हुई निर्माण अनुमति को सरेंडर कर रहे हैं। मेहता ने पत्र में बताया कि यह जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडीस से खरीदी गई थी।
पुलिस कमिश्नर को लिखे एक अलग पत्र में विधायक ने कहा कि वह वोरा के खिलाफ अपनी पिछली शिकायत वापस ले रहे हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है।
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