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BS6 के बाद अब BS7 की बारी, अप्रैल 2029 से नई कारों-SUV पर लागू होंगे नए मानक

Published: Thu, 15 Oct 2026 12:06 AM (GMT+05:30)

भारत सरकार ने अप्रैल 2029 से यात्री वाहनों के लिए कड़े 'भारत स्टेज-7' (बीएस-7) उत्सर्जन मानकों का प्रस्ताव किया है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना है।

BS6 के बाद अब BS7 की बारी।

BS6 के बाद अब BS7 की बारी।

HighLights

  1. अप्रैल 2029 से BS-7 उत्सर्जन मानक लागू होंगे।

  2. इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन भी दायरे में आएंगे।

  3. 'एनवायरनमेंटल व्हीकल पासपोर्ट' पारदर्शिता बढ़ाएगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की हवा को साफ और सांस लेने योग्य बनाने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं मंत्रालय ने पैसेंजर वाहनों के लिए कड़े 'भारत स्टेज-7' यानी (बीएस-7) उत्सर्जन मानकों का प्रस्ताव रखा है, जिन्हें एक अप्रैल 2029 से तीन चरणों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

यह पहल न केवल प्रदूषण पर लगाम कसेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए इस नए प्रस्ताव के दायरे में अब पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और हाइब्रिड गाड़ियों को भी शामिल किया गया है।

प्रस्तावित नियमों के तहत, पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी लाइफ और ब्रेकिंग सिस्टम से होने वाले प्रदूषण को भी नियंत्रित किया जाएगा।

इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के लिए यह अनिवार्य होगा कि उनकी बैटरियां पहले पांच वर्षों या एक लाख किलोमीटर तक कम से कम 75 प्रतिशत प्रदर्शन बनाए रखें। साथ ही, साल 2031 और 2035 तक टायर घिसाव और ब्रेक-पार्टिकल उत्सर्जन पर भी सख्त सीमाएं लागू कर दी जाएंगी।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाना

उल्लेखनीय है कि बीएस उत्सर्जन मानक वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और नुकसानदेह कणों जैसे प्रदूषकों की मात्रा की सीमा तय करते हैं। इनका उद्देश्य अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाना है। प्रदूषण नियंत्रण में तेजी लाने के लिए भारत ने बीएस-4 के बाद सीधे अप्रैल, 2020 में बीएस-6 मानक अपनाए थे। बीएस-6 वाहन के लिए कम सल्फर वाले ईंधन का इस्तेमाल जरूरी है।

बहरहाल, अब केवल प्रयोगशालाओं में ही नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ते वाहनों के वास्तविक प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वाहन मालिकों को एक 'एनवायरनमेंटल व्हीकल पासपोर्ट' दिया जाएगा, जिसके जरिये गाड़ी के प्रदूषण, ईंधन की खपत और बैटरी के स्वास्थ्य की पूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

यह मसौदा ऑटोमोबाइल उद्योग के भविष्य को संवारने के साथ-साथ हमारी भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। इस पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)