अयोध्या, जेएनएन। सुरेशदास का वैष्णव संतों की प्रमुख संस्था दिगंबर अखाड़ा के महंत के तौर पर राममंदिर से सरोकार है। वह उन रामचंद्रदास परमहंस के उत्तराधिकारी भी हैं जो दशकों तक मंदिर आंदोलन का चेहरा बनकर प्रतिष्ठित रहे और 22-23 दिसंबर 1949 की रात विवादित ढांचा के नीचे रामलला के प्राकट्य में अहम किरदार थे। उन्होंने ही 1950 में सिविल जज के यहां वाद दाखिल कर रामलला के दर्शन और पूजन का अधिकार मांगा था। रामचंद्रदास परमहंस 2003 में तो साकेतवासी हो गए पर उनके उत्तराधिकारी की हैसियत से सुरेशदास ने इस वाद को जिंदा रखा।

जाहिर है कि रामलला के हक में सुप्रीम फैसला आने के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है और वह उन सपनों को साकार होते देख रहे हैं, जिसे उनके गुरु परमहंस अर्ध शताब्दी से अधिक समय तक देखते रहे और जिसके लिए 94 साल की उम्र में स्वयं को समर्पित कर दिया। रामजन्मभूमि से इस कदर गहन सरोकार वाले सुरेशदास से दैनिक जागरण के रमाशरण अवस्थी की बातचीत के प्रमुख अंश ...

रामजन्मभूमि के हक में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कैसा महसूस कर रहे हैं?

फैसला उम्मीदों से बढ़ कर है। हमारी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं है। काश, आज गुरु परमहंस भी यह दिन देखने के लिए जीवित होते। उनकी आत्मा जहां होगी, आनंदित हो रही होगी।

रामजन्मभूमि मुक्ति का स्वप्न साकार होने में किसकी भूमिका अहम मानते हैं?

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सहित निर्णय देने वाली पीठ के सभी पांचों न्यायाधीशों को बारंबार प्रणाम। हम उन्हें भी नहीं भूल सकते, जिन्होंने सदियों से मंदिर के लिए अपना जीवन-अपने प्राण समर्पित किए। हम अपने गुरु रामचंद्रदास परमहंस के कृत्यों के प्रति भी अभिभूत हैं और उन दिनों को याद कर गौरवांवित हो रहे हैं, जब उन्होंने रामलला के प्राकट्य के लिए उद्यम किया होगा या अकेले अपने दम पर रामलला के दर्शन और पूजन के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया होगा।

फैसला आ गया, अब मंदिर का निर्माण कब तक शुरू होगा?

निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह के अंदर सरकार को ट्रस्ट गठित करने का आदेश दिया है। निश्चित रूप से तय समय के अंदर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठन का काम सरकार पूरा कर लेगी और इसके बाद मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा।

आपके हिसाब से मंदिर निर्माण कब तक शुरू होना चाहिए?

यदि संभावित ट्रस्ट के गठन की समय सीमा के हिसाब से विचार करें, तो रामजन्मभूमि पर मंदिर के शिलान्यास का समय आगामी रामनवमी को शुभ होगा। यूं भी भगवान राम के जीवन में चैत्र शुक्ल नवमी यानी राम नवमी की तिथि का अहम स्थान रहा है। इस दिन त्रेता में न केवल उनका प्राकट्य हुआ बल्कि इसी तिथि पर वह वन को गए, जो उनके जीवन का अहम चरण है।

आस्था के इस महाकेंद्र के शिलान्यास के लिए किसे उपयुक्त मानते हैं?

निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को। उम्मीद और अनुमान है कि वह शिलान्यास के लिए अयोध्या आएंगे। इसी दिन के इंतजार में वह पहले अयोध्या आने से परहेज भी करते रहे हैं।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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