नई दिल्ली (जयप्रकाश रंजन) । आंदोलन के बाद जाटों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलने की राह साफ भी हो जाए तो भी यह इस बात की गारंटी नहीं होगी कि हरियाणा में रोजगार की स्थिति सुधर जाए। राज्य में आये दिन होने वाले इस तरह के आंदोलन को देखते हुए उद्योग जगत अब हरियाणा को निवेश के लिए सही जगह नहीं मान रहा।

हरियाणा में पूरी तरह नहीं थमी है हिंसा की आग

मौजूदा जाट आरक्षण आंदोलन से राज्य में मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर सर्विस क्षेत्र तक की कंपनियों पर काफी उल्टा असर पड़ा है। इस आंदोलन ने एक पखवाड़े के भीतर होने वाले निवेशक सम्मेलन की सफलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में राज्य में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली कंपनियों ने बाहर का रास्ता कर लिया तो इससे राज्य में रोजगार के अवसर और कम हो सकते हैं।

देश के प्रमुख उद्योग चैंबर एसोचैम का कहना है कि जाट आरक्षण आंदोलन से न सिर्फ उद्योग जगत को 20 हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। राज्य के उद्योग जगत से बात करने पर यह बात सही लगती है। गुड़गांव उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण यादव का कहना है कि अभी हरियाणा में तैयार सामान न बाहरी राज्यों में जा पा रहा है और न ही बाहर से सामान यहां आ पा रहा है। पंजाब, जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और कुछ हद क उत्तराखंड को होने वाले उत्पादों की आपूर्ति ठप्प है। सिर्फ गुड़गांव के छोटे उद्यमियों को 500-700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

देश में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश करने वाली कंपनी मारुति सुजुकी की गुड़गांव स्थित प्लांट शनिवार से बंद है। इस प्लांट में रोजाना पांच हजार कारों का निर्माण होता है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कल-पुर्जे की आपूर्ति ठप्प होने की वजह से उत्पादन को बंद रखा गया है। कंपनी को रोजाना 2500 करोड़ रुपये की हानि हो रही है। कंपनी हरियाणा में कानून व व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार चिंता जता चुकी है। दो वर्ष पहले मारुति सुजुकी ने देश में अपना दूसरा प्लांट गुजरात में जब लगाने का फैसला किया था तब कहा गया था कि उसने राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था की वजह से ही यह कदम उठाया है। इस तरह के हड़ताल से कंपनी की पूरी तैयारियों पर असर पड़ता है।

हरियाणा राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 70 फीसद लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं। हड़ताल से सबसे ज्यादा इन पर असर पड़ता है। मारुति, होंडा, हीरो जैसी वाहन कंपनियों की सैकड़ों सहायक कंपनियां यहां स्थापित हुई हैं जिसने लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। हड़ताल आदि होने से इकानून व्यवस्था की दिक्कतों की वजह से मारुति सुजुकी और होंडा पहले ही राज्य से बाहर फैक्ट्री लगाने में जुट गई हैं। अगर इन्होंने राज्य में ही विस्तार किया होता तो यहां रोजगार के अवसर और बढ़ते। बहरहाल, इस हड़ताल से अगले महीने होने वाले निवेश सम्मेलन पर भी खतरा पैदा हो गया है।

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