4 सालों में 111 सांसदों-विधायकों ने जीतने के बाद बदली पार्टी, नगालैंड और बंगाल में सबसे ज्यादा दलबदल; ADR की रिपोर्ट
एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच 111 सांसदों और विधायकों ने चुनाव ...और पढ़ें

ममता की टीएमसी से बागी सांसदों ने कुछ समय पहले NCPI ज्वाइन की थी (फाइल फोटो- PTI)
HighLights
एडीआर रिपोर्ट: 111 सांसदों-विधायकों ने चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदली।
नगालैंड और बंगाल में सर्वाधिक दलबदल के मामले दर्ज किए गए।
एडीआर ने दलबदल विरोधी कानून में बदलाव की सिफारिश की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक दलों का पाला बदल लेने पर एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वाच ने विस्तृत विश्लेषण किया है।
इसके मुताबिक वर्ष 2022 से 2026 के बीच संसद या विधानसभाओं के चुनाव जीतने के बाद कुल 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी पार्टियां बदली हैं। इसमें नगालैंड और बंगाल में सबसे अधिक संख्या में ऐसे बदलाव दर्ज किए गए हैं।
इस विश्लेषण में इन चार सालों में हुए चुनावों और उपचुनावों को शामिल किया गया है, जिसमें 26 लोकसभा सदस्य, सात राज्यसभा सदस्य और 78 विधायक शामिल हैं जिन्होंने चुनाव किसी और दल से जीता और जीत के बाद किसी दूसरे दल में शामिल हो गए।
एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि मामलों में व्यक्तिगत पलायन, पार्टी विलय, इस्तीफे के बाद उपचुनाव में जीत और उपचुनाव में सीट जीतने के बाद अयोग्यता शामिल हैं।
एनडीपीपी, एआइटीसी और कांग्रेस ने 111 मामलों में से 64 का प्रतिनिधित्व किया, जो 58 प्रतिशत है। एनपीएफ, भाजपा व एनसीपीआइ ने मिलकर 111 विधायकों में से 81 का प्रतिनिधित्व किया, जो 73 प्रतिशत है।
हाल के पलायनों को कुछ विधानसभाओं में सरकारें गिरने से भी जोड़ा गया है। इसने स्पष्ट किया कि विधायकों के पार्टी बदलने का कोई आधिकारिक डेटाबेस नहीं है। इस निगरानी संस्था ने एंटी-डिफेक्शन ढांचे में बदलाव की सिफारिश की है।
इसमें सांसदों के मामले में अयोग्यता याचिकाओं का निर्णय लेने की शक्ति को अध्यक्षों से राष्ट्रपति को और विधायकों के मामले में राज्यपालों को स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। ऐसा चुनाव आयोग की सलाह पर कहा गया है।
इसने अयोग्यता याचिकाओं के निर्णय के लिए समयसीमा और पलायन करने वालों के लिए सार्वजनिक कार्यालय धारण करने पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव भी दिया है।
राज्यवार दल-बदल
नगालैंड में विधायकों के 32 मामलों के साथ सर्वाधिक संख्या दर्ज की गई। जबकि बंगाल में लोकसभा सदस्यों के 20 मामले दर्ज किए गए। तेलंगाना में विधायकों से संबंधित नौ मामले दर्ज। गोवा और पंजाब में भी आठ-आठ मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र में लोकसभा सदस्यों के छह मामले थे। दिल्ली में एक राज्यसभा सदस्य ने पार्टी बदली।
कितने सदस्य मिले
पार्टी बदलने से एनपीएफ को 32 विधायक मिले। भाजपा ने 29 और एनसीपीआइ को 20 विधायक मिले। कांग्रेस ने नौ, शिवसेना ने आठ, एनपीपी ने छह व पीपुल्स पार्टी आफ अरुणाचल ने चार विधायक हसिल किए। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
