नई दिल्ली,एएनआइ। भारत के मशहूर चित्रकार और लेखक सतीश गुजराल का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी सतीश अपनी पेंटिंग्स के लिए जाने जाते थे। वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई थे।

सतीश गुजराल का निधन 25 दिसंबर, 1925 में ब्रिटिश इंडिया के झेलम(अब पाकिस्तान) में हुआ। 26 मार्च 2020 को उन्होंने आखिरी सांस ली। लाहौर स्थित मेयो स्कूल ऑफ आर्ट में पांच सालों तक उन्होंने विभिन्न विषयों में शिक्षा हासिल की। इस दौरान उन्होंने ग्राफिक डिजायनिंग का भी अध्ययन किया।

सतीश गुजराल का कला के क्षेत्र में अमुल्य योगदान के देने के लिए कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। यही नहीं भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 1999 में पद्म विभूषण भी प्रदान किया जा चुका है। अपनी जिंदगी में कठिन संघर्षों के बाद भी सतीश गुजराल ने कभी हार नहीं मानी। इसी का नतीजा था की उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गुजराल को कानों में सुनने में दिक्कत थी, जिसके चलते कई स्कूलों ने उनका ए़डमिशन अपने स्कूल में करने से साफ इनकार कर दिया। एक दिन उन्होंने पक्षियों को पेड़ पर सोते हुए देखा। इसके बाद उन्होंने इस छवि की पेंटिंग बनाई। यह उनका चित्रकारी करने की तरफ पहला रुझान था। इसके बाद वर्ष 1939 में उन्होंने लाहौर में आर्ट स्कूल में एडमिशन लिया। वर्ष 1944 में वह मुंबई चले गए। जहां उन्होंने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में एडमिशन लिया।  बीमारी के कारण सन 1947 में उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

बचपन में इनका स्वास्थ्य काफ़ी अच्छा था। आठ साल की उम्र में पैर फिसलने के कारण इनकी टांगे टूट गई और सिर में काफी चोट आने के कारण इन्हें कम सुनाई पड़ने लगा। परिणाम स्वरूप लोग सतीश गुजराल को लंगड़ा, बहरा और गूंगा समझने लगे। सतीश चाहकर भी आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए। ख़ाली समय बिताने के लिए चित्र बनाने लगे। इनकी भावना प्रधान चित्र देखते ही बनती थी।

Posted By: Pooja Singh

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