कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाने की नापाक साजिश, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के नए चीफ ने तैनात की बार्डर एक्शन टीम
पाकिस्तान में एक महीने पहले हुए बड़े नेतृत्व परिवर्तन के तहत मेजर जनरल मुहम्मद शमरेज खान को देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई का नया प्रमुख नियुक्त किया गया।

अब कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाने के लिए बार्डर एक्शन टीम तैनात करने की नापाक साजिश (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के नए चीफ मेजर जनरल मोहम्मद शमराज खान की अगुआई में खतरनाक षड्यंत्र
भारतीय चौकियों को निशाना बनाने के लिए आतंकी संगठनों के साथ बॉर्डर एक्शन टीम तैयार कर रही है पाकिस्तानी सेना
आईएएनएस, नई दिल्ली। पाकिस्तान में एक महीने पहले हुए बड़े नेतृत्व परिवर्तन के तहत मेजर जनरल मुहम्मद शमरेज खान को देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई का नया प्रमुख नियुक्त किया गया।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब गुलाम कश्मीर में बने लांचपैड से भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने में लगातार नाकामी का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तानी हुक्मरानों को उम्मीद है कि खान इस घुसपैठ की रणनीति में आमूल-चूल बदलाव करेंगे और जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकवादियों की एंट्री सुनिश्चित करेंगे, ताकि वे वहां लंबे समय तक सक्रिय रह सकें।
भारतीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी के अनुसार, शमरेज खान वर्तमान में उन आतंकी समूहों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं जो भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की फिराक में हैं।
अधिकारी ने बताया कि खान ने अभी तक किसी तरह का उतावलापन नहीं दिखाया है, बल्कि वे बार्डर एक्शन टीमों (बैट) को मजबूत करने की दिशा में ठोस काम कर रहे हैं ताकि आतंकवादियों की घुसपैठ में मदद मिल सके।
आईएसआई पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर ऐसी कई टीमों को गठित करने की तैयारी में है। नई रणनीति के तहत, इन 'बैट' टीमों का आकार छोटा होगा, जिसमें पहले जहां 7 से 10 सदस्य होते थे, वहीं अब अधिकतम चार से पांच सदस्य (दो पाकिस्तानी कमांडो और दो आतंकवादी) ही शामिल किए जाएंगे।
हालांकि इनकी ताकत कम होगी, लेकिन मकसद ऐसी कई टीमें तैयार करना है ताकि भारतीय सुरक्षा बलों को और अधिक उलझाया जा सके। मेजर जनरल खान 40 फील्ड रेजिमेंट के अधिकारी हैं।
आईएसआई प्रमुख बनने से पहले वे सिंध रेंजर्स का नेतृत्व कर रहे थे और 2023 में पदोन्नति के बाद उन्होंने खरियान में 17वीं इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। इस डिवीजन के पास 'बैट' बलों को संभालने का अनुभव है। हालांकि उनके पास खुफिया अभियानों का लंबा अनुभव नहीं है, लेकिन 'बैट' अभियानों में उनका मैदानी अनुभव रहा है।
पिछले एक महीने के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अलावा लश्कर-ए-तैबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडरों के साथ कई बैठकें की हैं।
