'पति का दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध अपने आप में क्रूरता नहीं', मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी
मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पति का दूसरी महिला से अवैध संबंध होना पत्नी के प्रति अपने ...और पढ़ें

कोर्ट की प्रतिकात्मक तस्वीर।
HighLights
पति का अवैध संबंध स्वतः क्रूरता नहीं: मद्रास हाई कोर्ट।
अपराध साबित करने को अतिरिक्त सबूत जरूरी होंगे।
निचली अदालत के पति को बरी करने का फैसला बरकरार।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच दूसरी महिला के संबंध के बारे में ताजा टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि किसी पति का दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होना विवाहित महिला के प्रति क्रूरता नहीं माना जाएगा।
शुक्रवार को जस्टिस सुंदर मोहन ने कहा कि अभियोजन पक्ष को केवल अवैध संबंध होने के अलावा कुछ और भी साबित करना होगा। तब जाकर अपराध (पहले आईपीसी की धारा 498ए अब बीएनएस की धारा 85 और 86) साबित होगा।
महिला ने कर ली थी आत्महत्या
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले से भी इस स्थिति की पुष्टि होती है। इसके लिए उन्होंने 'पिनाकिन महीपतराय रावल बनाम गुजरात राज्य'मामले का हवाला दिया। इसके बाद कोर्ट ने मृत महिला के भाई की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया। इस मामले में महिला ने अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ आत्महत्या कर ली थी।
कोर्ट ने पति को सभी आरोपों से किया बरी
आत्महत्या की वजह उसके पति के अवैध संबंधों एवं दहेज के लिए प्रताड़ित करना था। 23 अप्रैल 2018 को, एक महिला अदालत ने पति को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके लिए अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से लगाए जा रहे दहेज की मांग और पति के अवैध संबंधों को लेकर लगे आरोपों को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने ये भी नहीं माना की महिला के साथ कोई क्रूरता की गई, क्योंकि अभियोजन पक्ष की ओर से ऐसा कोई सबूत नहीं सौंपा जा सका।
महिला के भाई ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा
राज्य सरकार ने इस बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ किसी बड़े कोर्ट में अपील नहीं की। इस वजह से मृत महिला के भाई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने ही शिकायत देकर इस मामले में सुनवाई का अनुरोध किया।
नहीं साबित हुए कोई भी आरोप
कोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज का ये तर्क कि अवैध संबंध साबित नहीं हुए। ये भी नहीं कहा जा सकता कि इस मामले में जिस महिला के साथ पति के अवैध संबंध थे, उससे पूछताछ नहीं की गई थी। ये पूरी तरह से गलत है। कोर्ट ने कहा की केवल पति के अवैध संबंध होने भर से ही इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।
जज ने कहा कि सबूतों का स्वतंत्र रूप से आकलन करने पर अदालत को लगता है कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित नहीं कर पाया है।
