नई दिल्ली, प्रेट्र। ओएनजीसी को सेवा दे रहा पवन हंस का एक हेलीकाप्टर मंगलवार को मुंबई तट से लगभग 50 समुद्री मील (लगभग 92 किलोमीटर) दूर अरब सागर में गिर पड़ा। इस दुर्घटना में ओएनजीसी के तीन कर्मचारियों समेत चार लोग मारे गए। हेलीकाप्टर में दो पायलट और ओएनजीसी के छह कर्मचारी सवार थे। कंपनी के साथ काम करने वाले ठेकेदार से जुड़ा एक व्यक्ति भी हेलीकाप्टर में था। हादसे का शिकार हुआ सिकोरस्की हेलीकाप्टर बिल्कुल नया था। इसे पवन हंस ने हाल ही में माइलस्टोन एविएशन ग्रुप से पट्टे पर लिया था।

यह हेलीकाप्टर मुंबई तट से 50 समुद्री मील दूर ओएनजीसी रिग-सागर किरण में उतरने का प्रयास कर रहा था, जब यह दुर्घटना हुई। अधिकारियों ने बताया, ओएनजीसी रिग से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले हेलीकाप्टर समुद्र में गिर पड़ा। चालकों ने तत्परता दिखाते हुए फ्लोटर खोल लिया, जिसके चलते यह डूबने से बच गया। किन परिस्थितियों में यह हादसा हुआ, इसका पता नहीं चल सका है। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही ओएनजीसी और नौसेना ने बचाव अभियान शुरू कर दिया।

ओएनजीसी के पोत मालवीय-16 की मदद से चार लोगों को निकाला गया। एक व्यक्ति को रिग की राहत नौका से बचाया गया। चार लोगों को बेहोशी की हालत में नौसेना के हेलीकाप्टर ने एयरलिफ्ट किया और मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां इन लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। ओएनजीसी के पास मुंबई तट के निकट गैस और तेल के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। पवन हंस का हेलीकाप्टर नियमित रूप से कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को तेल प्रतिष्ठान तक लेकर जाता है।

पहले भी होती रही हैं दुर्घटनाएं

मंगलवार की घटना ओएनजीसी के इतिहास में कोई पहला हादसा नहीं है। अगस्त 2003 में एमआइ-172 हेलीकाप्टर मुंबई तट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें 27 यात्री और पायलट मारे गए थे। जनवरी 2018 में पवन हंस का हेलीकाप्टर मुंबई से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद अरब सागर में गिर पड़ा। इसमें ओएनजीसी के सात अधिकारी और दो पायलट मारे गए। अप्रैल 2003 में ओएनजीसी के कर्मचारियों को ले जा रहा बेल-412 हेलीकाप्टर जुहू हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

अरब सागर में ओएनजीसी के हैं कई रिग और प्रतिष्ठान

ओएनजीसी के अरब सागर में कई रिग और प्रतिष्ठान हैं जिनका उपयोग समुद्र तल के नीचे स्थित जलाशयों से तेल और गैस का उत्पादन करने के लिए किया जाता है। ओएनजीसी ने हेलीकाप्टर पर सवार कर्मियों को बाहर निकालने के लिए पास के प्रतिष्ठानों से जहाजों को तैयार किया गया था।

Edited By: Achyut Kumar