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नोएडा के विवादित फ्लैटों के असली मालिकों की होगी पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपी जांच की कमान

Published: Sat, 03 Oct 2026 02:05 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना को एक-सदस्यीय, उच्चाधिकार प्राप्त और स्वतंत्र समिति के तौर पर नियुक्त किया है।

हाई कोर्ट के पूर्व जज करेंगे नोएडा स्थित फ्लैटों के दावेदारों की जांच (फोटो- एएनआई)

हाई कोर्ट के पूर्व जज करेंगे नोएडा स्थित फ्लैटों के दावेदारों की जांच (फोटो- एएनआई)

HighLights

  1. फ्लैट के असली हकदार लोगों और बाद में खरीदने वालों के बीच गतिरोध

  2. नोएडा प्रशासन ने बाद के खरीदारों को मान्यता देने का विरोध किया

एएनआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना को एक-सदस्यीय, उच्चाधिकार प्राप्त और स्वतंत्र समिति के तौर पर नियुक्त किया है।

यह समिति नोएडा में मल्टी-स्टोरी फ्लैट पाने के असली हकदार लोगों और बाद में फ्लैट खरीदने वालों की सूची की जांच करेगी और इसे अंतिम रूप देगी।

यह आदेश 'केंद्रीय कर्मचारी सहकारी गृह निर्माण समिति' से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में आया है। कोर्ट ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद यह मामला अब भी अनसुलझा है।

2022 में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह सोसाइटी के 844 पहचाने गए सदस्यों को मल्टी-स्टोरी फ्लैट आवंटित करे। बाद में फ्लैट खरीदने वाले 133 लोगों के दावों की जांच का भी निर्देश दिया गया था।

हालांकि, बाद की सुनवाई में कोर्ट के सामने विरोधाभासी आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इनमें मूल खरीदारों की संख्या बदलकर 863 और बाद में फ्लैट खरीदने वालों की संख्या 120 बताई गई।

नोएडा प्रशासन ने बाद के खरीदारों को मान्यता देने का विरोध किया। इसने आवंटन के हस्तांतरण पर लगी पाबंदियों और 1998 में मूल आवंटन रद किए जाने का हवाला दिया।

वहीं, सोसाइटी का तर्क था कि नोएडा प्रशासन हस्तांतरण आवेदन पर कार्रवाई करने में नाकाम रहा। इस गतिरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सक्सेना को अपनी प्रक्रिया तय करने, संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने और संबंधित दावेदारों की बात सुनने के लिए अधिकृत किया।