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'96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान एमडीआर से बाहर', सरकार ने विदेशी प्रभाव के दावों को किया खारिज

Published: Thu, 17 Sep 2026 05:50 AM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 07:11 AM (IST)

मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि 2016 में लांच होने के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम ...और पढ़ें

96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान एमडीआर से बाहर'- सरकार

96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान एमडीआर से बाहर'- सरकार

HighLights

  1. भारत यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है

  2. ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल अब भी मुफ्त है

  3. सरकार ने विदेशी प्रभाव के दावों को किया खारिज

आईएएनएस, नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई इकोसिस्टम में एमडीआर परिवर्तन विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है।

मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि 2016 में लांच होने के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है। यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। विदेशी प्रभाव संबंधी दावे गलत हैं।

भारत यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है

भारत यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है। हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर, समावेशी और सस्ता डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है। सरकार के अनुसार, यूपीआई ने अकेले इस साल अगस्त में 24.5 अरब ट्रांजेक्शन प्रोसेस किया।

इस सिस्टम को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और नवोन्मेषी बनाए रखने के लिए ज्यादा कीमत वाले लेनदेन पर मामूली फीस लेने का प्रस्ताव है।

ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल अब भी मुफ्त है। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना–इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगता है।

प्रेट्र के अनुसार, एक शीर्ष अधिकारी ने जब पूछा गया कि क्या सरकार इस कदम को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा कि सोच-समझकर यह निर्णय लिया गया है। इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।

सरकार ने विदेशी प्रभाव के दावों को किया खारिज

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई इकोसिस्टम में एमडीआर परिवर्तन विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है।

मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि 2016 में लांच होने के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है। यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। विदेशी प्रभाव संबंधी दावे गलत हैं।

भारत यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है। हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर, समावेशी और सस्ता डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है।

सरकार के अनुसार, यूपीआई ने अकेले इस साल अगस्त में 24.5 अरब ट्रांजेक्शन प्रोसेस किया। इस सिस्टम को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और नवोन्मेषी बनाए रखने के लिए ज्यादा कीमत वाले लेनदेन पर मामूली फीस लेने का प्रस्ताव है।

ग्राहकों के लिए यूपीआइ का इस्तेमाल अब भी मुफ्त है। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना–इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगता है।

प्रेट्र के अनुसार, एक शीर्ष अधिकारी ने जब पूछा गया कि क्या सरकार इस कदम को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा कि सोच-समझकर यह निर्णय लिया गया है। इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।