हरिकिशन शर्मा, नई दिल्ली। देश के दूसरे बड़े बैंक 'पंजाब नेशनल बैंक' में अब तक का सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड सामने आने के बाद भले ही आर्थिक और राजनीतिक जगत में तहलका मच गया हो लेकिन हकीकत यह है कि बैंकों में फ्रॉड के 92 प्रतिशत मामले लोन से संबंधित होते हैं। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक ऐसे मामलों को पकड़ने और इनकी सूचना रिजर्व बैंकों को देने में विलंब भी करते हैं। बैंकों ने अगर फ्रॉड रोकने के लिए आरबीआइ के एक पूर्व डिप्टी गवर्नर के 12 सूत्रीय मंत्र पर अमल किया होता तो कई मामलों में जालसाजी को रोका जा सकता था।

रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एस एस मुंद्रा के अनुसार वर्ष 2016 में बैंकों में जितने फ्रॉड हुए उनमें से 92 प्रतिशत लान से संबंधित थे। खास बात यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लोन संबंधी फ्रॉड के मामले अपेक्षाकृत ज्यादा हुए जबकि निजी बैंकों में यह आंकड़ा कम था। मुंद्रा के मुताबिक लोन से संबंधित अधिकांश फ्रॉड के मामलों में 3-4 साल तक लोन को फंसे कर्ज (एनपीए) की श्रेणी में रखा गया लेकिन उसके बाद उधार लेने वाले व्यक्ति को जालसाज घोषित कर दिया गया।

मुंद्रा का कहना है कि फ्रॉड होने और इसे पकड़ने के बीच में समय का गैप बढ़ता जा रहा है। इसका मतलब यह है कि बैंक फ्रॉड के मामलों को त्वरित गति से आरबीआइ के समक्ष सूचित नहीं कर रहे हैं। बैंकों को फ्रॉड के मामलों की जल्द पहचान कर, समय बरबाद किए बगैर शीघ्र ही ऐसे लोन खातों को फ्रॉड घोषित करना चाहिए। ऐसा करने में न तो उन्हें कार्रवाई करने में हिचक नहीं दिखानी चाहिए। मुंद्रा का मानना है कि जो भी ग्राहक लोन लेने के मामले में धोखाधड़ी का दोषी पाया जाए उससे फ्रॉड की पूरी राशि वसूलकर कम से कम पांच साल तक किसी भी बैंकिंग या वित्तीय संस्था से लोन लेने पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।

मुद्रा ने बैंकों में लोन फ्रॉड के मामलों के संबंध में यह अहम खुलासा वर्ष 2017 के शुरु में मुंबई में एक सार्वजनिक व्याख्यान में किया था। उन्होंने फ्रॉड के मामलों को नियंत्रित करने के लिए 12 सूत्रीय मंत्र भी बैंकों को दिया था। उन्होंने साफ तौर पर बताया था कि बैंकों को फ्रॉड रोकने के लिए क्या-क्या करना चाहिए। हालांकि पंजाब नेशनल बैंक में 11,400 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आने के बाद यह स्पष्ट है कि सरकारी बैंकों ने इस सूत्र पर गंभीरता से विचार नहीं किया।

वैसे पीएनबी के साथ 11400 करोड़ रुपये का फ्रॉड करने वाले नीरव मोदी का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले पांच वर्षो में बैंकों में लोन संबंधी फ्रॉड के 8,670 मामले सामने आए हैं। ये मामले 61,000 करोड़ रुपये से अधिक के हैं। इस तरह के अधिकांश मामलों में बैंक से उधार लेने वाले व्यक्ति ने लोन लेकर न चुकाने के इरादे से किसी तरह बैंक को फंसाकर धनराशि उधार ली है।

 

Posted By: Kishor Joshi

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