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सेन्हा [लोहरदगा]। लोहरदगा पूरी तरह अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसा हुआ है। डायन-बिसाही के नाम पर किसी की जान ले लेना यहां आम बात हो गई है। मंगलवार को ऐसी ही घटना में एक वृद्धा और एक वृद्ध की पीट-पीटकर जान ले ली गई। वारदात सेन्हा थाने से महज आठ किमी दूर चितरी-डांडू गांव में हुई।

सेन्हा थाना प्रभारी अंजनी कुमार का कहना है कि यह घटना अंधविश्वास से प्रेरित है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर घटना को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

घटना के बाद से गांव में खामोशी पसरी है। ग्रामीण इस संबंध में मुंह खोलने के तैयार नहीं। सूत्रों की मानें तो सोमवार की रात ही ग्रामीणों ने बैठक कर महिला और वृद्ध को मौत की सजा देने का निर्णय ले लिया था। ग्रामीण गांव में किसी की मौत या बीमारी के लिए दोनों वृद्धों को ही जिम्मेवार समझते थे। होली के समय गांव के फूलसिन उरांव की पुत्री रेखा कुमारी [12 वर्ष] की मौत बीमारी की वजह से हो गई थी। ग्रामीण रेखा की मौत वृद्ध देवठान व वृद्धा गंदुवा द्वारा जादू-टोना करने की वजह से होने की बात कह रहे थे। अंतत: दोनों को मौत के घाट उतार देने का फैसला हुआ।

फैसले को अमल में लाने के लिए मंगलवार को ग्रामीण एकजुट हुए। दोपहर देवठान उरांव [65 वर्ष] पशुओं को चराने निकला। उधर स्वर्गीय मुखन उरांव की पत्नी गंदुवा उराईन [75 वर्ष] गांव के आंगनबाड़ी के समीप बैठी थी। ग्रामीणों ने दोनों को घेर लिया और लाठी-डंडा व टांगी मारकर जान ले ली।

देवठान की पुत्रवधू चुमानी उरांव वार्ड सदस्य हैं, जबकि गंदुवा का पुत्र विजय उरांव सेना का जवान है। लोहरदगा में हाल के दिनों में अंधविश्वास को लेकर कई घटनाओं को अंजाम दिया गया है। जागरूकता की कमी, अशिक्षा और सरकारी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाए जाने के कारण इस पर रोकथाम नहीं लग पा रही।

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