ग्वालियर (नईदुनिया)। अगर कुछ करने का जुनून हो तो दुनिया की कोई की ताकत आपके हौसलों को कमजोर नहीं सक सकती। इसी हौसले और जुनून की मिसाल पेश की है 71 वर्षीय एसबी गोयल ने। जिन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया और परस्थितियों के आगे कभी घुटने नहीं टेके।

71 वर्षीय गोयल ने पेश की मिसाल

वे युवाओं के लिए कुछ करना चाहते थे। अंग्रेजी के शिक्षक थे, इसलिए चाहता थे कि कुछ ऐसी किताबें लिखें, जिन्हें पढ़कर बच्चों को आसानी से अंग्रेजी का ज्ञान मिल सके। उनके लिए रोजगार की राह आसान हो सके, लेकिन 25 साल पहले अचानक उनकी आंखों की रोशनी चली गई। परिवार के लोगों ने हिम्मत बंधाई। उनके जज्बे ने साथ दिया और अंग्रेजी की पांच किताबें लिख डालीं। यह कहानी है ग्वालियर के 71 वर्षीय एसबी गोयल की। द्वारिकापुरी में रहने वाले गोयल की आंखें नहीं हैं, लेकिन वह अपने ज्ञान से बच्चों व युवाओं की जिंदगी को रोशन कर रहे हैं। वे किताबें लिखने के अलावा पिछले 50 सालों से अंग्रेजी की कोचिंग भी संचालित कर रहे हैं और लगभग 5 लाख लोगों को वो इस भाषा की शिक्षा दे चुके हैं। गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाते हैं।

भाई और नाना ने भी गंवाई थीं आंखें

गोयल ने बताया कि उनके नानाजी की आंखों की रोशनी भी अपने आप चली गई थी। इसी तरह उनके दोनों भाइयों की आंखों की रोशनी भी चली गई है। आंखों की रोशनी के बाद वो डॉक्टर के पास गए। इलाज भी कराया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

दूसरे शहरों के युवा भी खरीदते हैं पुस्तकें

गोयल द्वारा लिखी गई पुस्तकें मार्केट में उपलब्ध हैं। दूसरे शहरों के युवा भी इंग्लिश सीखने के लिए इन पुस्तकों को खरीदते हैं। इसके अलावा इंग्लिश की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी दूसरे स्थानों से युवा यहां आते हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तकों को लिखने में उनके पुत्र मनोज गोयल ने सहयोग किया।

ये हैं 5 पुस्तकें

1. ट्रेजर ऑफ मॉडर्न इंग्लिश

2. ट्रेजर एंड प्लेजर

3. ग्रेट ट्रेजर ऑफ स्पोकन इंग्लिश

4. ट्रेजर ऑफ एडवांस इंग्लिश ग्रामर

5. द प्लेजर ऑफ इंग्लिश स्पीकिंग

By Nancy Bajpai