नई दिल्ली। सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले करीब 70 फीसदी कर्मचारी यू-ट्यूब में वीडियो देखते हैं। इसके चलते इंटरनेट बैंडविड्थ बाधित हो रही है। नतीजतन मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी ई-ऑफिस प्रोजेक्ट अभी भी परवान नहीं चढ़ पा रहा है।

यह बात सभी मंत्रालयों के लिए आयोजित की गई ई-ऑफिस वर्कशॉप में सामने आई। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि जूनियर अधिकारियों को छोटे कंप्यूटर मॉनिटर दिए गए हैं। इससे वे डिजिटाइज्ड फाइलों को आसानी से नहीं देख पाते हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ई-ऑफिस के कॉन्सेप्ट को पूरी तरह लागू किया है। मंत्रालय ने वर्कशॉप में बताया कि कैसे तरह सभी फाइलों को डिजिटाइज किया जाता है, ताकि ऑफिस को पूरी तरह पेपरलेस बनाया जा सके।

डेमो देते हुए दिखाया गया कि 700 पन्नों की फाइल को करीब 6 मिनट में कैसे स्कैन किया जा सकता है। सिर्फ 5 मिनट में ई-फाइल बनाकर भी अधिकारियों को दिखाया गया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के जॉइंट सेक्रटरी संतोष मैथ्यू ने कहा कि अधिकारी जांचे कि कौन कर्मचारी कितना यू-ट्यूब देख रहा है। उन्होंने कहा कि जूनियर अधिकारियों को ई-ऑफिस अपनाने के लिए प्रेरित करना चुनौती भरा काम है। कारण, इससे उनकी मॉनिटरिंग होनी शुरू हो जाएगी। राजपथ दुनिया का सबसे महंगा इलाका है और ये शर्म की बात है कि यहां हम पेपर स्टोर कर रहे हैं।

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