नई दिल्ली, संजीव गुप्ता। दिल्ली-एनसीआर सहित देशभर में चल रही आक्सीजन की किल्लत को दूर करने के लिए 59 औद्योगिक इकाइयां भी 10 जून तक अपने नाइट्रोजन प्लांट से आक्सीजन उत्पादन करना शुरू कर देंगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की बोर्ड बैठक में सोमवार शाम इसके लिए इन इकाइयों को आधिकारिक तौर पर अनुमति दे दी गई। इनमें दिल्ली, हरियाणा व बिहार की एक-एक जबकि पंजाब एवं राजस्थान की छह-छह औैद्योगिक इकाइयां भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार के निर्देश पर सीपीसीबी ने देशभर की लगभग 500 औद्योगिक इकाइयों से संपर्क किया था। पहले चरण में 14 राज्यों की 59 इकाइयों को चिह्नित कर नाइट्रोजन प्लांट से आक्सीजन उत्पादन करने की इजाजत दी गई है। इनमें तीन इकाइयों ने आक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि 55 इकाइयां 10 जून तक उत्पादन शुरू कर देंगी। इन इकाइयों से प्रतिदिन कुल 41.83 टन आक्सीजन का उत्पादन होगा और जो एक बार में 4,183 लोगों की जान बचाने में मददगार साबित होगी।

सीपीसीबी के मुताबिक कुछ संयंत्र नजदीकी अस्पतालों में स्थानांतरित किए जाएंगे, जबकि कुछ जहां हैं, वहीं से आक्सीजन का उत्पादन कर इसकी आपूर्ति करेंगे।

ऐसे कर सकते हैं आक्सीजन का उत्पादन

नाइट्रोजन संयंत्रों में कार्बन आण्विक छलनी (सीएमएस) की जगह जियोलाइट आण्विक छलनी (जेडएमएस) के इस्तेमाल, आक्सीजन एनालाइजर की स्थापना, कंट्रोल पैनल सिस्टम में परिवर्तन, फ्लो वाल्व आदि कुछ बदलाव कर चिकित्सीय उपयोग के लिए आक्सीजन का उत्पादन किया जा सकता है। खास बात यह कि जेडएमएस की उपलब्धता के साथ इस तरह के संशोधित संयंत्र महत चार पांच दिनों में स्थापित किए जा सकते हैं, जबकि एक नए आक्सीजन संयंत्र की स्थापना में तीन चार सप्ताह लग सकते हैं।

किस राज्य की कितनी औद्योगिक इकाइयों को अनुमति

राज्य औैद्योगिक इकाइयां

आंध्र प्रदेश 6

बिहार 1

दिल्ली 1

गुजरात 15

हरियाणा 1

कर्नाटक 1

मध्य प्रदेश 4

महाराष्ट्र 7

पंजाब 6

राजस्थान 6

तमिलनाडु 1

तेलंगाना 8

दादरा एवं नागर हवेली 2

नाइट्रोजन प्लांट को अस्थायी रूप से आक्सीजन संयंत्र में बदलने के इच्छुक उद्यमियों को हर स्तर पर सहयोग किया जाएगा। एक नाइट्रोजन प्लांट को आक्सीजन प्लांट में बदलने का खर्च भी सिर्फ आठ लाख रुपये ही आता है। उससे एक टन आक्सीजन का प्रतिदिन उत्पादन हो सकता है। सीपीसीबी ने एक आनलाइन पोर्टल भी शुरू कर दिया है।-डा. अनिल गुप्ता, सदस्य, सीपीसीबी