मुंबई। केंद्र सरकार भले ही लाख कार्रवाई की चेतावनी दे लेकिन सिविल सेवक संपत्ति का ब्योरा देने के फरमान को लगातार अनसुना कर रहे हैं। हाल ही में एक आरटीआइ से पता चला है कि महाराष्ट्र के 294 आइएएस अफसरों में से 56 ने वर्ष 2012 में संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें से चार महिला अफसर हैं।

पुणे के आरटीआइ कार्यकर्ता विहार धुरवे ने राज्य सरकार से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि पिछले साल 19 फीसद नौकरशाहों ने अपने निवेश का ब्योरा नहीं सौंपा है। जबकि सिविल सेवकों के 2010 और 2011 के संपत्ति के ब्योरे पिछले साल राज्य सचिवालय (मंत्रालय) में लगी आग में स्वाहा हो गए। केंद्र सरकार के अधीन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने 2010 के दिशानिर्देश में साफ कहा है कि सिविल सेवकों को हर साल एक जनवरी को अपने निवेश की जानकारी सरकार को देनी है। कार्मिक विभाग ही सिविल सेवकों की प्रतिनियुक्ति एवं अन्य प्रशासनिक दायित्वों को संभालता है। संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वालों में बीएमसी आयुक्त सीताराम कुंटे और वरिष्ठ नौकरशाह सतीश गवई भी शामिल हैं। धुरवे ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण को पत्र लिखकर आदेश न मानने वाले नौकरशाहों पर कार्रवाई की मांग की है।

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