नई दिल्ली। विश्व हिंदी सम्मेलन हिंदी भाषा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें दुनिया भर से हिंदी विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार, भाषा विज्ञानी, विषय विशेषज्ञ तथा हिंदीप्रेमी जुटते हैं। पिछले 40 वर्षों से यह दुनिया के अलग-अलग देशों में आयोजित किया जाता रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैसी पहचान हिंदी को मिलनी चाहिए, वह आज तक नहीं मिल पाई है। हिंदी आज भी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनने को तरस रही है। इसकी लंबे समय से मांग होती चली आ रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रभाषा के प्रति जागरुकता पैदा करने, हिंदी की विकास यात्रा का आकलन करने, हिंदी के प्रयोग को प्राेत्सािहित करने आदि के लिए भारत सरकार ने पहली बार 1975 में विश्व हिंदी सम्मेलन की शुरुआत की। इसकी पहल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी। पहला सम्मेलन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के सहयोग से नागपुर में संपन्न हुआ था। तब से अब तक नौ विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर, माॅरीशस, नई दिल्ली, पुन: मारीशस, त्रिनिडाड व टोबेगो, लंदन, सूरीनाम, न्यूयार्क और जोहांसबर्ग में संपन्न हुए हैं। दसवां सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया जा रहा है।

अब तक हुए विश्व हिन्दी सम्मेलन

पहला सम्मेलन :

पहला सम्मेलन 10 जनवरी से 14 जनवरी 1975 तक नागपुर में आयोजित किया गया। सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के तत्वावधान में हुआ। सम्मेलन से संबंधित राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष महामहिम उपराष्ट्रपति बी डी जत्ती थे। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अध्यक्ष मधुकर राव चौधरी उस समय महाराष्ट्र के वित्त, नियोजन व अल्पबचत मंत्री थे। पहले विश्व हिंदी सम्मेलन का बोधवाक्य था- वसुधैव कुटुम्बकम। सम्मेलन के मुख्य अतिथि थे मॉरीशस के प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम, जिनकी अध्यक्षता में मॉरीशस से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने भी सम्मेलन में भाग लिया था। इस सम्मेलन में 30 देशों के कुल 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दूसरा सम्मेलन :

दूसरे विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन मॉरीशस की धरती पर हुआ। मॉरीसस की राजधानी पोर्ट लुई में 28 अगस्त से 30 अगस्त 1976 तक चले विश्व इस सम्मेलन के आयोजक राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष, मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ॰ सर शिवसागर रामगुलाम थे। सम्मेलन में भारत से तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्री डॉ॰ कर्ण सिंह के नेतृत्व में 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। भारत के अतिरिक्त सम्मेलन में 17 देशों के 181 प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

तीसरा सम्मेलन :

तीसरे विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली में 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 1983 तक किया गया। सम्मेलन में कुल 6,566 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिनमें विदेशों से आए 260 प्रतिनिधि भी शामिल थे। हिंदी की सुप्रसिद्ध कवियत्री महादेवी वर्मा समापन समारोह की मुख्य अतिथि थीं।

चौथा सम्मेलन :

चौथे विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन 2 से 4 दिसंबर 1993 तक मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में आयोजित किया गया। 17 साल बाद मॉरीशस में एक बार फिर विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा था। म्मेलन में मॉरीशस के अतिरिक्त लगभग 200 विदेशी प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

पांचवां सम्मेलन :

पांचवें विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन 4 अप्रैल से 8 अप्रैल 1996 के बीच त्रिनिदाद एवं टोबेगो की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में हुआ था। सम्मेलन के प्रमुख संयोजक थे हिंदी निधि के अध्यक्ष श्री चंका सीताराम। भारत की ओर से इस सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडल के नेता अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल माता प्रसाद थे। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था- प्रवासी भारतीय और हिंदी। सम्मेलन में भारत से 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। अन्य देशों के 257 प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।

छठा सम्मेलन :

छठा विश्व हिंदी सम्मेलन लंदन में 14 से 18 सितंबर 1999 तक आयोजित किया गया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था- हिंदी और भावी पीढ़ी। सम्मेलन में विदेश राज्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल के उपनेता थे प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ॰ विद्यानिवास मिश्र। इस सम्मेलन का ऐतिहासिक महत्त्व इसलिए है क्योंकि यह हिंदी को राजभाषा बनाए जाने के 50वें वर्ष में आयोजित किया गया। यही वर्ष संत कबीर की छठी जन्मशती का भी था। सम्मेलन में 21 देशों के 700 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें भारत से 350 और ब्रिटेन से 250 प्रतिनिधि शामिल थे।

सातवां सम्मेलन :

सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन 5 से 9 जून 2003 के बीच सुदूर सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो में हुआ था। इक्कीसवीं सदी में आयोजित यह पहला विश्व हिंदी सम्मेलन था। सम्मेलन के आयोजक थे जानकी प्रसाद सिंह और इसका केंद्रीय विषय था- विश्व हिंदी: नई शताब्दी की चुनौतियां। सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह ने किया। सम्मेलन में भारत से 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें 12 से अधिक देशों के हिंदी विद्वान व अन्य हिंदी सेवी सम्मिलित हुए।

आठवां सम्मेलन :

आठवां विश्व हिंदी सम्मेलन 13 जुलाई से 15 जुलाई 2007 तक अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुआ था। इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय था- विश्व मंच पर हिंदी। इसका आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा किया गया। न्यूयॉर्क में सम्मेलन के आयोजन से संबंधित व्यवस्था अमेरिका की हिंदी सेवी संस्थाओं के सहयोग से भारतीय विद्या भवन ने की थी। इसके लिए एक विशेष वेवसाइट का निर्माण भी किया गया।

नौवां सम्मेलन :

नौवां विश्व हिंदी सम्मेलन 22 से 24 सितंबर 2012 तक दक्षिण अफ्रीका के शहर जोहांसबर्ग में संपन्न हुअा। इस सम्मेलन में 22 देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग 300 भारतीय शामिल हुए। सम्मेलन में तीन दिन चले मंथन के बाद कुल 12 प्रस्ताव पारित किए गए और विरोध के बाद एक संशोधन भी किया गया।

दसवां सम्मेलन :

दसवां विश्व हिंदी सम्मेलन 10 से 12 सितंबर के बीच भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य विषय है-हिंदी जगत : विस्तार एवं संभावनाएं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे।

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Posted By: Sanjay Bhardwaj

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