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Criminal Laws: नए आपराधिक कानूनों पर रोक लगाने के लिए 3695 लोगों ने किए हस्ताक्षर, नेशनल फारेंसिक इन्फ्रास्ट्रकेचर बढ़ाने की योजना को मंजूरी

नए आपराधिक कानूनों पर रोक लगाने के लिए देश भर के 3695 नागरिकों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में सत्तारुढ़ गठबंधन राजग और विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए में शामिल विभिन्न दलों के नेताओं से हस्तक्षेप करने और नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन को रोकने का आग्रह किया गया है। हस्ताक्षर करने वाले लोगों ने नए आपराधिक कानूनों को लोकतंत्र विरोधी बताया है।

By Agency Edited By: Jeet Kumar Wed, 19 Jun 2024 11:56 PM (IST)
नए आपराधिक कानूनों पर रोक लगाने के लिए 3695 लोगों ने किए हस्ताक्षर

 पीटीआई, नई दिल्ली। नए आपराधिक कानूनों पर रोक लगाने के लिए देश भर के 3,695 नागरिकों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में सत्तारुढ़ गठबंधन राजग और विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए में शामिल विभिन्न दलों के नेताओं से हस्तक्षेप करने और नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन को रोकने का आग्रह किया गया है।

हस्ताक्षर करने वाले लोगों ने नए आपराधिक कानूनों को लोकतंत्र विरोधी बताया है। याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख लोगों में तुषार गांधी, तनिका सरकार, हेनरी टीफागने, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सुधीर वोम्बटकेरे, तीस्ता सीतलवाड़, कविता श्रीवास्तव और शबनम हाशमी शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों एन चंद्रबाबू नायडू एवं नीतीश कुमार तथा राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी को संबोधित यह याचिका विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख लोगों को भेजी गई है।

जिन लोगों को यह याचिका भेजी गई है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने नए आपराधिक कानूनों के संबंध में जेपीसी जांच, कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है।

नेशनल फारेंसिक इन्फ्रैस्ट्रकेचर बढ़ाने की योजना को मंजूरी

आपराधिक मामलों में सजा की दर बढ़ाने और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सही और जल्दी न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल फारेंसिक इनफ्रास्ट्रेक्टर बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है।

कुल 2254.43 करोड़ की यह योजना 2024-25 से शुरू होकार 2028-29 की अवधि में लागू होगी। इस योजना के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नेशनल फारेंसिक साइंस यूनीवर्सिटी का कैंपस स्थापित किया जाएगा।

इसके अलावा हर राज्य और प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश में सेंट्रल फारेंसिक साइंस लैबोरेट्री स्थापित होगी। सेंट्रल सेक्टर की इस स्कीम में दिल्ली स्थित नेशनल फारेंसिक साइंस यूनीवर्सिटी के दिल्ली कैंपस का इन्फ्रास्ट्रक्टर भी बढ़ाया जाएगा। योजना का खर्च गृह मंत्रालय के बजट से दिया जाएगा।

आइपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनिमय की जगह लेंगे

उद्देश्य है कि अच्छी लैबोरेट्रीज स्थापित हो जहां छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा सके। इस योजना के तहत हर साल 9000 छात्रों को प्रशिक्षण देने की क्षमता विकसित करना है। देश में जुलाई से तीन नये क्रिमिनल ला लागू होने वाले हैं जो आइपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनिमय की जगह लेंगे।

नये आपराधिक कानूनों में साक्ष्य में वैज्ञानिक सबूतों को काफी महत्व दिया गया है ऐसे में देश के सभी राज्यों में नेशनल फारेंसिक साइंस यूनीवर्सिटी के कैंपस और सेंटर फारेंसिक साइंस लैबोरेट्री की स्थापना महत्वपूर्ण होगी।

इससे जब वैज्ञानिक साक्ष्य आने लगेंगे तो सही दोषी को सजा मिलेगी और दोष सिद्धि की दर में वृद्धि होगी। अगर सजा की दर में बढ़त होती है तो लोगों की अपराध करने की प्रवृत्ति घटती है।