नई दिल्ली। संप्रग सरकार के 77 मंत्रियों में से 35 प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समक्ष अपनी संपत्तियों और देनदारियों का वार्षिक ब्योरा पेश करने में नाकाम रहे हैं। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह, कानून मंत्री कपिल सिब्बल, कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, मानव संसाधन मंत्री एमएम पल्लम राजू, शशि थरूर और जल संसाधन मंत्री हरीश रावत का नाम शामिल हैं। हैरत की बात यह है कि इस काम केलिए तय मियाद (31 अगस्त) को गुजरे एक माह से ज्यादा हो चुका है।

जानकारी के अनुसार,प्रधानमंत्री को ब्योरा न देने वाले माननीयों की सूची में गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, वाणिज्य मंत्री डी पुंदेश्वरी देवी, ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप जैन और रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी का नाम शामिल हैं। मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल 32 कैबिनेट मंत्रियों में से 18, स्वतंत्र प्रभार वाले 12 मंत्रियों में से 7 और 33 राज्य मंत्रियों में से 17 ने संपत्ति का ब्योरा पेश किया है। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी, कृषि मंत्री शरद पवार, गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली, श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और ऑस्कर फर्नाडीज उन लोगों में हैं, जिन्होंने आचार संहिता का पालन करते हुए निधार्रित समय सीमा के भीतर प्रधानमंत्री को अपनी संपत्ति और देनदारियों की जानकारी दी हैं।

ज्ञात हो, माननीयों के लिए तय आचार संहिता के तहत केंद्र और राज्यों के सभी मंत्रियों को हर साल अपनी और परिजनों की संपत्तियों, व्यावसायिक हितों और देनदारियों का ब्योरा देना होता है। केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री को और राज्यों के मंत्री मुख्यमंत्री को आय-व्यय का विवरण देते हैं। कैबिनेट सचिव की ओर से केंद्रीय मंत्रियों को संपत्ति घोषणा की याद भी दिलाई जाती है।

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