पणजी, एजेंसियां। ऑक्सीजन की कमी के चलते गोवा और आंध्र प्रदेश में 37 और मरीजों की जान चली गई है। दोनों राज्य सरकारों ने मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार ने मृतकों के स्वजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।

गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने मंगलवार को कहा कि सरकारी गोवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में तड़के दो से छह बजे के बीच 26 मरीजों की मौत हो गई। उन्होंने मौतों के कारणों पर कुछ नहीं कहा और बताया कि मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

अस्पताल का दौरा करने वाले गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि ऑक्सीजन की उपलब्धता और अस्पताल के कोरोना वार्ड में उसकी सप्लाई के बीच कमी मौतों की वजह हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में ऑक्सीजन सप्लाई की कोई समस्या नहीं है।

वहीं, राणे ने पत्रकारों से बातचीत में अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की बात मानी। उन्होंने कहा कि सोमवार को अस्पताल को 1200 बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी, जबकि सप्लाई सिर्फ 400 सिलेंडर की हुई थी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को इस मामले की जांच करनी चाहिए।

आंध्र प्रदेश के तिरुपति में रुइया सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखे गए 11 मरीजों ने दम तोड़ दिया। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के स्वजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी एलान किया है।

पांच मिनट के लिए कम हुआ था प्रेशर

अस्पताल की अधीक्षक डॉ. भारती ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई में प्रेशर कम होने की वजह से यह हादसा हुआ। चित्तूर के जिलाधिकारी ने कहा कि सोमवार रात साढ़े आठ बजे के करीब मुश्किल से पांच मिनट के लिए ऑक्सीजन सप्लाई में प्रेशर कम हुआ था और इसी बीच यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में और भी कई मरीज वेंटिलेटर पर रखे गए हैं और सभी का सही तरीके से इलाज चल रहा है।

 

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