नई दिल्ली, प्रेट्र। भारत ने पाकिस्तान के सामने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम के दौरान नागरिकों को निशाना बनाने का मुद्दा उठाया है। अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने के बाद संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में तेजी आई है। सेना के सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

61 घटनाओं में मोर्टार और बड़े हथियारों का इस्तेमाल

सेना ने एक अक्टूबर को सैन्य संचालन महानिदेशक के नेतृत्व में पाकिस्तानी समकक्ष के साथ हुई वार्ता में यह मुद्दा उठाया। पिछले महीने सेना ने पुंछ जिले में गोलीबारी के बीच स्कूली छात्रों को बचाया था। जुलाई में संघर्ष विराम उल्लंघन की 296, अगस्त में 307 और सितंबर में 292 घटनाएं हुई। सितंबर में 61 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई जिसमें मोर्टार और बड़े हथियारों का इस्तेमाल किया गया। जुलाई 2018 में सेना ने संघर्ष विराम की 13 घटनाएं दर्ज की थीं। इसके बाद अगस्त में 44 और सितंबर में 102 घटनाएं हुई थी। 2017 में जुलाई में संघर्ष विराम की 68, अगस्त में 108 और सितंबर में 101 घटनाएं दर्ज की गई।

सितंबर में संघर्ष विराम उल्‍लंघन की 292 घटनाएं

इस साल सितंबर में ऐसी 292 घटनाएं हुई। उत्तरी पीर पंजाल में 42 क्रास बार्डर फायरिंग हुई जबकि शेष माउंटेन रेंज के दक्षिण में हुई। पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में बहुत ज्यादा तनाव पैदा हो गया है। जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया है। सेना के सूत्रों ने कहा कि इस साल जुलाई-सितंबर के दौरान आतंकी घुसपैठ की मात्र 24 घटनाएं हुई। 2018 और 2017 की इसी अवधि में क्रमश: 114 और 31 घटनाएं हुई थी।

पाकिस्‍तान ने किया 2317 युद्धविराम का उल्लंघन

पाकिस्‍तान ने जनवरी से 10अक्‍टूबर, 2019 तक 2317 युद्धविराम का उल्लंघन किया, जबकि सुरक्षा बलों द्वारा नियंत्रण रेखा और भीतरी इलाकों में अलग-अलग अभियानों में 147 आतंकवादी मारे गए। यह जानकारी भारतीय सेना के सूत्रों से मिली है। इसमें बताया गया है कि पाकिस्‍तान ने 2018 में 1629 युद्धविराम का उल्लंघन किया, जबकि सुरक्षा बलों द्वारा नियंत्रण रेखा और भीतरी इलाकों में अलग-अलग अभियानों में 254 विदेशी कमांडरों समेत आतंकवादी मारे गए।

Posted By: Arun Kumar Singh

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