नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। नक्सल इलाकों में मोबाइल सेवा पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। दूरसंचार आयोग ने यूएसओ फंड से 2199 टावरों के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस पर 3000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दूरसंचार आयोग के फैसले पर कैबिनेट की स्वीकृति लेनी होगी। इसके साथ नक्सली इलाकों में 2015 तक नई सड़कें बनाने की भी योजना है। इस पर 3700 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

नक्सली इलाकों में यूएसओ [यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन] फंड से मोबाइल टावर लगाने का प्रस्ताव दो साल पहले गृह मंत्रालय ने भेजा था। टेलीग्राफ एक्ट के तहत बनाए गए इस फंड से ग्रामीण इलाकों में किफायती दर पर संचार सेवाएं मुहैया कराने के उपाय किए जाते हैं। गृह मंत्रालय का मानना है कि मोबाइल संपर्क बढ़ने से इन इलाकों में रहने वाले आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ेगी और इससे नक्सलियों के विस्तार पर रोक लग सकती है। शायद यही कारण है कि नक्सली मोबाइल टावर गिराने में जुटे हैं। पिछले कुछ सालों में नक्सली अपने इलाकों में सैकड़ों मोबाइल टावर गिरा चुके हैं। इसीलिए गृह मंत्रालय ने नए टावरों को थानों और सुरक्षा बलों के कैंपों के नजदीक बनाने का सुझाव दिया है।

गृह मंत्रालय की मूल योजना में 2199 टावरों को लगाने पर लगभग 5800 करोड़ रुपये की लागत आंकी गई थी। इसमें पांच सालों तक इन टावरों के चालू रखने का खर्च भी शामिल था। इस बाबत पिछले साल दूरसंचार विभाग ने कैबिनेट नोट का प्रारूप भी तैयार कर लिया था, लेकिन राजस्व विभाग ने लागत पर सवाल उठाते हुए योजना का विरोध किया था। बाद में दूरसंचार आयोग को इसका हल निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिस पर आयोग ने गृह मंत्रालय के मूल प्रस्ताव में संशोधन करते हुए इन टावरों के लिए 3000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव किया है। माना जा रहा है कि इसमें टावरों को चलाने का खर्च शामिल नहीं है।

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