श्रीनगर, जेएनएन। दक्षिण कश्मीर के लित्तर पुलवामा में शनिवार को लश्कर के जिला कमांडर वसीम शाह के मारे जाने के साथ ही इस साल सुरक्षाबलों के हाथों कश्मीर में मारे गए नामी आतंकी कमांडरों की संख्या 20 हो गई है। वादी में करीब 10 माह के दौरान सुरक्षाबलों ने लगभग 170 आतंकियों को विभिन्न मुठभेड़ों में मार गिराया है।

वसीम शाह का मारा जाना सुरक्षाबलों के ऑपरेशन ऑलआउट की दोहरी कामयाबी माना जा रहा है। वह जुलाई, 2016 में मारे गए हिज्ब के तत्कालीन पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी के साथ 2015 में एक तस्वीर में नजर आने वाले आतंकियों में शामिल था। उस तस्वीर में शामिल अब दो ही आतंकी जिंदा बचे हैं और उनमें से भी एक तारिक पंडित जेल में है, जबकि दूसरा सद्दाम पडर सुरक्षाबलों से बचता फिर रहा है।

इस साल नामी आतंकी कमांडरों के मारे जाने का सिलसिला सोपोर में तीन जनवरी को अबु उमर की मौत के साथ शुरू हुआ था। उसके बाद कुपवाड़ा में 15 मार्च को अबु माला, अनस भाई और अबु मंसूर मारे गए। वहीं बड़गाम में सुरक्षाबलों ने 22 अप्रैल को अबु अली को मार गिराया। इसी साल पहली अगस्त को सुरक्षाबलों ने तीन साल से सिरदर्द बने लश्कर कमांडर अबु दुजाना को पुलवामा में मार गिराया। वह 2015 में ऊधमपुर के पास बीएसएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की साजिश में भी शामिल था। उसने तीन वर्षो के दौरान सुरक्षाबलों पर हाईवे पर हुए छह हमलों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उसके साथ मारा गया आरिफ ललहारी भी ए-श्रेणी का आतंकी था।

सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बने थे कई आतंकी

दुजाना और आरिफ को मार गिराने के बाद सुरक्षाबलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के ऑपरेशनल फील्ड कमांडर महमूद गजनवी जिसका असली नाम यासीन यत्तु था, को अवनीरा शोपियां में मार गिराया। उसके साथ मारे गए अन्य दो आतंकियों में उमर मजीर और इरफान उल हक थे। इरफान भी एक साल से सुरक्षाबलों के लिए बड़ा सिरदर्द था। यासीन यत्तु को मार गिराने के लगभग एक माह बाद सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र कनीपोरा में अबु इस्माइल और छोटा कासिम को मार गिराया। अबु इस्माइल ने ही जुलाई में श्री बाबा अमरनाथ के श्रद्घालुओं की बस पर हमले की साजिश को अंजाम दिया था।

इस साल नियंत्रण रेखा पर मारे गए 70 आतंकी

पुलिस महानिरीक्षक (आइजी), कश्मीर मुनीर अहमद खान ने शनिवार को कहा कि इस साल अब तक करीब 70 आतंकी नियंत्रण रेखा(एलओसी) पर ही मारे गए हैं। दक्षिण कश्मीर में लश्कर के दो आतंकियों के मारे जाने के बाद उन्होंने कहा कि वादी के भीतरी इलाकों में ही नहीं एलओसी पर भी आतंकियों व घुसपैठियों के खिलाफ लगातार अभियान चल रहे हैं। सेना का घुसपैठ रोधी तंत्र पूरी तरह समर्थ और मजबूत है। यही कारण है कि इस साल अब तक सरहद पार से घुसपैठ की कोई बड़ी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि लोग भी आतंकियों के खिलाफ आगे आ रहे हैं।

आइजी ने आतंकी संगठनों में स्थानीय युवकों की भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें सोशल मीडिया का भी रोल है। शरारती तत्व इसका इस्तेमाल छात्रों को गुमराह करने में कर रहे हैं। कई नौजवान सोशल मीडिया पर ही आतंकी बनने को प्रेरित हुए हैं।

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