25 साल की सजा पूरी कर अबू सलेम ने की रिहाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

अबू सलेम की रिहाई वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी आतंकी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अबू सलेम ने कहा है कि जेल में उसे 25 साल पूरे हो गए हैं, इसलिए उसे जेल से रिहा किया जाए।
1993 के मुंबई बम धमाकों में 257 लोग मारे गए थे।
अबू सलेम ने कोर्ट में लगाई अर्जी
अबू सलेम के वकील ने दलील दी कि स्पेशल TADA कोर्ट ने साफ कहा था कि उसे अंडरट्रायल में बिताए समय का लाभ मिलेगा। लेकिन जेल अधिकारी वो लाभ नहीं दे रहे।
ANI के मुताबिक वकील ने कहा, TADA कोर्ट के निर्देशों के बावजूद जेल वाले मुझे क्रेडिट देने से मना कर रहे हैं। सलेम का कहना है कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तों के हिसाब से उसने 24 दिसंबर 2024 को 25 साल पूरे कर लिए। उसने हिसाब दिया अंडरट्रायल 11 साल 10 महीने, सजा के तौर पर 10 साल और अच्छे व्यवहार पर 3 साल से ज्यादा की छूट जोड़कर उसे 25 साल हो गए हैं।
पहले सुप्रीम कोर्ट ने सलेम को अंतरिम राहत देने से मना कर दिया था और उसे बॉम्बे हाई कोर्ट जाने को कहा था। हाई कोर्ट ने अब उसकी याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है।
सीबीआई ने रखी शर्त
CBI की स्पेशन TADA कोर्ट ने बताया कि रिहाई से पहले सलेम को 16.51 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। ये जुर्माना 2 मामलों का है। बिजनेसमैन प्रदीप जैन की हत्या और 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट। CBI ने कहा कि अगर अगर 12 अक्टूबर 2030 तक पैसा नहीं भरा तो सलेम को कोर्ट द्वारा तय अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।
अबू सलेम अभी नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद है। उसने कोर्ट से पूछा था कि जुर्माना भरना जरूरी है या नहीं। इस पर CBI ने कहा कि जुर्माना भरना जरूरी है।
प्रत्यर्पण की शर्त
अबू सलेम को 2005 में पुर्तगाल से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण के समय ये शर्त थी कि उसकी सजा 25 साल से ज्यादा नहीं होगी। तब से उसकी जेल की अवधि की गिनती को लेकर कई बार कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है।
