नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। खाड़ी के छह देशों में हर रोज करीब 15 भारतीयों की मौत हो रही है। यह आंकड़ा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की तरफ से सामने आया है। इसके मुताबिक 2014 से इस वर्ष तक 33988 भारतीयों की मौत हो चुकी है। पांच वर्षों में होने वाली इन मौतों ने सभी को चौंका दिया है। खाड़ी के ये छह देश कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर, ओमान, यूएई हैं। इन आंकड़ों की जानकारी लोकसभा में कांग्रेस के सांसद एन उत्‍तम कुमार रेड्डी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्‍य मंत्री वी मुरलीधरन ने दी है। उन्‍होंने सदन को बताया है कि भारतीयों की सबसे ज्‍यादा मौत सऊदी अरब और फिर यूएई में हुई हैं। 

चौंकाने वाले आंकड़े

सरकार की तरफ से जो चीजें सामने आई हैं वह चौंकाने वाली हैं। बीते पांच वर्षों में सऊदी अरब में 1920 मौतें, यूएई में 1451 मौतें, कुवैत 584, ओमान में 402, कतर में 286 और बहरीन में 180 भारतीयों की मौत हुई है। आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो पता चलता है कि वर्ष 2014 लेकर 2018 लगातार इन मौतों में तेजी आई है। 2014 में यह जहां 5388 थीं वहीं 2015 में बढ़कर 5786 हो गईं। 2016 में इन मौतों का आंकड़ा बढ़कर 6013 हो गया था। हालांकि 2017 में इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई है। इस समय यह 5604 था, जो 2018 में बढ़कर  6014 पर पहुंच गया। इसी वर्ष अब तक 4823 भारतीयों की मौत हो चुकी हैं।

तेलंगाना भी ऐसा ही एक राज्‍य 

आपको यहां पर ये भी बता दें कि तेलंगाना भी उन राज्‍यों में शामिल है जहां से काफी संख्‍या में लोग खाड़ी देशों में जाते हैं। बीते पांच वर्षों में यहां के भी 1200 लोगों की मौत इन देशों में हुई है। तेलंगाना सरकार की एनआरआई विंग इसका पूरा रिकॉर्ड रख रही है। तेलंगाना सरकार ने खाड़ी देशों में हुई मौतों के बाद ऐसे लोगों के पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था भी की है। 

मौतों के पीछे की वजह

जानकार मानते हैं कि इन मौतों की वजह भारतीयों का कर्ज में डूबना है। इसकी एक अन्‍य वजह अवैध तरीके से इन देशों में जाना भी है और गलत एजेंटों के हाथों में पड़ जाना भी होता है। इन सभी की वजह से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों का जीवन दूभर हो जाता है जो असमय मौत की वजह बनता है। खाड़ी देशों में हो रही भारतीयों की मौतों के बाद विदेश मंत्रालय को इस संबंध में 15051 शिकायतें भी मिली हैं। इनमें से अधिकतर एजेंटों को लेकर शिकायत की गई थी।

   

इनको लेकर भी मिली शिकायत 

सदन में जवाब देते हुए मुरलीधरन ने ये भी बताया कि भारतीय वर्कर्स ने सैलरी न मिलने को लेकर भी अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं।  इसके अलावा परमिट को लेकर और ओवरटाइम अलाउंस, साप्‍ताहिक अवकाश और काम के लंबे घंटों को लेकर भी मंत्रालय को शिकायतें मिली हैं। मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में यहां तक बताया गया है कि कांट्रेक्‍ट की अवधि खत्‍म होने के बाद भी भारतीयों को घर वापसी की इजाजत न देने को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। साथ ही खाड़ी देशों में काम करने वालों को इंश्‍योरेंस और मेडिकल की सुविधा को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। आपको बता दें कि अप्रेल 2018 तक खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की संख्‍या 87.76 थी। ब्‍लू कॉलर के इन लोगों ने करीब 33.47 बिलियन डॉलर भारत भेजी थी।  

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Posted By: Kamal Verma

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