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रामकृष्ण मुले, इंदौर। मुलुंड (मुंबई) निवासी श्वेतांबर जैन समाज का 13 साल का धैर्य कुमार मध्य प्रदेश के इंदौर में दीक्षा लेकर जैन मुनि बनेगा। बड़े भाई के बाद अब उसने भी नाजुक कदमों से वैराग्य की कठिन डगर पर चलने का फैसला किया है। स्कूल जाने की उम्र में माता-पिता और गुरु की अनुमति केबाद सभ्रांत परिवार का मुमुक्षु दीक्षा लेगा।

आठवीं तक सांसारिक शिक्षा ले चुका धैर्य कहता है कि उसका घर और खेल-कूद में मन नहीं लगता। उसे गुरु के साथ स्वाध्याय, पैदल विहार और साधु जीवन में ही आनंद आता है। इसलिए कई बार गुरु से निवेदन करने के बाद अब उनसे दीक्षा की आज्ञा मिली है।

छह साल पहले 14 साल की उम्र में बड़े भाई प्रभव ने भी दीक्षा ली थी। अब वह जैन मुनि पा‌र्श्व सुंदर विजयजी के रूप में पहचाने जाते हैं। मुनि पा‌र्श्व सुंदर विजयजी का कहना है कि मेरे सांसारिक परिवार में माता-पिता और हम दो भाई हैं। पिता चेतनभाई शाह और माता मैना शाह हैं।

पिता का भवन निर्माण के लिए प्लास्टर पावडर के सप्लाय का काम है। उन्होंने मेरी दीक्षा के समय भी आपत्ति नहीं ली थी और न ही धैर्य की दीक्षा से उन्हें कोई आपत्ति है।

साधु जीवन की चुनौतियों पर परखने के बाद दी अनुमति
(आचार्य श्रीमद् विजयरत्नसूरीश्वर महाराज से सीधी बात)

-इतनी कम उम्र में किसी बच्चे को दीक्षा दिलाना क्या उचित है?
धैर्य आठ साल की उम्र से हमारे साथ है। उसने कई बार दीक्षा की इच्छा जताई। इसके बाद उसे साधु जीवन की सारी कठिनाइयों की जानकारी दी गई। उसे समझाया गया, लेकिन उसकी लगन के बाद ही दीक्षा दिलाने का फैसला किया।

-वयस्क होने के बाद अगर उसे फैसला गलत लगे तो फिर क्या होगा?
वयस्क होने के बाद लोग शादी करते हैं, फिर भी तलाक हो जाता है। काम अच्छा हो या बुरा, इसमें रिस्क फैक्टर भी होता है, लेकिन जीवन में संगत का बड़ा योगदान है।

तीन दिनी दीक्षा महोत्सव में जुटेंगे समाजजन
वीरमणि चंद्रप्रभ स्वामी जैन श्वेतांबर मंदिर एवं उपाश्रय रिलियजस ट्रस्ट के तत्वावधान में तीन दिनी दीक्षा महोत्सव 17 से 19 जनवरी को बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स रेसकोर्स रोड पर होगा। संयोजक कल्पक गांधी ने बताया कि पहले दिन दोपहर 2.30 बजे कपड़ा रंगने की विधि और वरसीदान का कार्यक्रम शाम सात बजे होगा। 18 को वर्षीदान का वरघोड़ा सुबह 9.30 बजे निकाला जाएगा। 19 को दीक्षा की विधि सुबह 6.45 बजे शुरू होगी।

बीबीए पढ़ी नेहा लेंगी दीक्षा, बनेंगी साध्वी
इंदौर में बीबीए तक पढ़ाई करने वाली 22 वर्षीय नेहा सुराणा सांसरिक सुखों को त्याग कर आध्यात्मिक संसार में प्रवेश करेंगी। संतों के सान्निध्य में 16 वर्ष की उम्र में ही रही नेहा 10 फरवरी को जैन संत जिनेंद्रमुनि से दीक्षा लेकर जैन साध्वी बनेंगी।

Posted By: Arun Kumar Singh

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