नई दिल्ली, प्रेट्र। तेरह उच्च न्यायालयों ने अपने यहां जजों के खाली पड़े 123 पदों पर नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश कर दी है। फिलहाल यह मामला हरी झंडी के लिए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के पास लंबित है। यह स्थिति तब है, जब देश के सभी 24 हाई कोर्ट में जजों के स्वीकृत 1079 पदों में से 403 खाली हैं।

गौर करने लायक बात यह है कि उच्च न्यायालयों में सभी खाली पड़े पदों को भरने के लिए 280 नामों की सिफारिश होना अभी भी बाकी है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि एक फरवरी तक 13 हाई कोर्ट में जज पद पर नियुक्ति के लिए 123 नामों की सिफारिश केंद्र और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के पास विचाराधीन है। इनमें से 43 नाम कोलेजियम के समक्ष लंबित हैं, जबकि 80 नाम केंद्र सरकार के पास विचाराधीन हैं। सूत्रों के अनुसार, इन आंकड़ों से पता चलता है कि हाई कोर्ट के कोलेजियम ने अभी तक जजों के बाकी खाली पड़े 280 पदों के लिए किसी भी नाम की सिफारिश नहीं की है। 

इलाहाबाद में 56 तो कलकत्ता में 39 पद रिक्त 

कानून मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक फरवरी तक जजों के सबसे ज्यादा खाली पद इलाहाबाद हाई कोर्ट में है। इस उच्च न्यायालय में जजों के 56 पद रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्ति के लिए सिफारिश केंद्र और कोलेजियम के समक्ष लंबित है। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय का नंबर आता है, जहां न्यायाधीशों के 39 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार कर्नाटक हाई कोर्ट में भी 38 पद खाली हैं। 

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जजों के 35 पद खाली

मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी जजों के 35 पद खाली हैं। इन पर नियुक्ति के लिए सिफारिश भी लंबित है। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश/तेलंगाना हाई कोर्ट में भी 30 पद रिक्त हैं।

उच्च न्यायापालिका में जजों की नियुक्ति संबंधी नियमों के अनुसार, हाई कोर्ट कोलेजियम न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिए नाम सबसे पहले कानून मंत्रालय को भेजता है। खुफिया जांच के बाद मंत्रालय प्रस्तावित नामों की फाइल सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम को अग्रसारित करता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम उन नामों पर अपनी मुहर लगाकर फाइल फिर सरकार को भेजती है। अब सरकार उस अनुमोदन को स्वीकार भी कर सकती है या फिर पुनर्विचार के लिए उसे सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम को लौटा भी सकती है।

Posted By: Manish Negi