नई दिल्ली (विशेष संवाददाता) । भोपाल में 10,11 और 12 सितंबर को आयोजित होने वाला 10 वां विश्व हिंदी सम्मेलन इस बार साहित्य नहीं, बल्कि भाषा पर केंद्रित होगा। जिसमें 27 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य विषय होगा हिंदी जगत: विस्तार एवं संभावनाएं।

जिससे जुड़े अलग--अलग 12 विषयों पर इस दौरान चर्चा होगी। कार्यक्रम का उद्घाटन 10 सितंबर को सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को बताया कि अब तक जितने भी हिंदी सम्मेलन हुए हैं,उनमें सिर्फ साहित्य के इर्द-गिर्द ही चर्चाएं रहीं। पहली बार ऐसा होगा कि हिंदी भाषा की मजबूती के लिए चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि सम्मेलन से सार्थक परिणाम भी निकले, इसके लिए प्रत्येक विषय की चर्चा सत्र की एक रिपोर्ट बनेगी। बाद में उसके आधार पर ही उनका अमल तय किया जाएगा। चर्चा में शामिल किए सभी 12 विषयों के दो सत्र होंगे। इस तरह सम्मेलन में कुल 28 सत्र होंगे। कार्यक्रम का समापन 12 सितंबर को गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

उद्घाटन और समापन सत्र में रहेंगे पांच--पांच हजार लोग

विदेश मंत्री ने बताया कि सम्मेलन के उद्घाटन और समापन सत्रों में पांच--पांच हजार लोगों को आमंत्रित किया गया है, जबकि चर्चा सत्रों में प्रत्येक सत्र में तीन--तीन हजार लोग शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में आने वाले तीन हजार प्रतिनिधियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

शिक्षक की भूमिका में दिखेंगे अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चन शिक्षक के रोल में दिखेंगे। जो लोगों को यह सिखाते देखे जाएंगे, कि आओ अच्छी हिंदी बोले। सुषमा स्वराज ने इस दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि अमिताभ बच्चन को इसके लिए कोई भुगतान नहीं किया जा रहा।

129 देश दें समर्थन, तो हिंदी बने संयुक्त राष्ट्र की भाषा

विदेश मंत्री ने एक सवाल के जवाब में बताया कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाने के लिए 129 देशों का समर्थन चाहिए। उन्होंने उस सवाल को खारिज किया, कि इसमें पैसों की कोई भूमिका है।

हिंदी पर कोई राजनीति नहीं, नीतीश को भी बुलाया

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सम्मेलन में देश के सभी हिंदी भाषी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया है। बिहार के सीएम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसमें शामिल हैं। सोमवार सुबह ही उनसे बात की है। उन्होंने कहा कि हिंदी पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सम्मेलन में देश के सभी विश्वविद्यालयों के हिंदी विभागाध्यक्षों को भी पांच- पांच छात्रों के साथ आमंत्रित किया गया है।

Edited By: Test1 Test1

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