संवाद सहयोगी, जालंधर : बस्ती दानिशमंदा में हुए गोलीकांड के मामले में पीड़ित परिवार पर झूठा पर्चा दर्ज करने के आरोप में लोगों ने नकोदर चौक पर जाम लगाया। पांच घंटे तक ट्रैफिक बाधित कर डीसीपी जसकिरणजीत सिंह तेजा और आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सुबह 11 बजे लगे धरने के कारण लोग काफी परेशान हुए क्योंकि एक तरफ से रास्ता बिल्कुल बंद कर दिया गया था। पुलिस ने दोपहर बाद चार बजे धरना खत्म करवाया और रास्ता खुलवाया। पांच घंटे तक लोग जाम की वजह से खासे परेशान रहे और पुलिस वहां पर मूकदर्शक बन कर तमाशा देखती रही। पुलिस ने धरना नहीं उठवाया और न ही प्रदर्शनकारियों को वहां से हट जाने के लिए कहा। धरने के दौरान एक एंबुलेंस भी फंस गई। धरना प्रदर्शन करने वालों में कुछ लोगों ने उसे जाने के लिए रास्ता दिया लेकिन कुछ वहीं डटे रहे। इस दौरान वहां पर पुलिस कर्मियों ने पहुंचकर देखा तो एंबुलेंस में मरीज था, जिसके चलते पुलिस कर्मियों ने एंबुलेंस को धरना प्रदर्शन करने वालों के बीच में से निकलवाया।पुलिस ने शहर में नौ जगह पर धरना लगाने वालों की इजाजत दी हुई हैं। नकोदर रोड पर बिना इजाजत धरना दिया गया। डीसीपी जसकिरणजीत सिंह तेजा ने कहा कि लोगों को परेशान करने की इजाजत किसी को नहीं है। जिस किसी को परेशानी है या सुनवाई नहीं हो रही, वो सीधा उनसे आकर मिल सकता है। पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।

--------------------------------------------- इन दो मामलों को लेकर दिया धरना

पहला : समझौते के बावजूद पुलिस पर्चा रद नहीं कर रही

बस्ती दानिशमंदा में दो महीने पहले दीपू नाम के युवक के साथ कुछ युवकों का विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने बस्ती दानिश्मंदा के युवक सुंदर और उसके भाई पर मामला दर्ज कर दिया था। सुंदर ने बताया कि वह और उसका भाई अपने घर में थे और उनका विवाद से कोई लेन-देन नहीं है। इसकी सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को दी गई थी। पीड़ित पक्ष ने बताया कि डीसीपी तेजा ने उनका राजीनामा भी करवा दिया था लेकिन पर्चा रद करने की रिपोर्ट जानबूझकर नहीं बनाई जा रही। डीसीपी उन पर विधायक के दफ्तर जाकर बात करने के लिए उन पर दबाव बना हैं जबकि विधायक के आफिस नहीं जाना चाहते। उन्होंने कहा कि उन्हें इंसाफ चाहिए इसलिए वह धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरा : हादसे में मौत के बाद पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया

धरने पर बैठे परिवार के साथ सिद्धार्थ नगर निवासी भजन लाल चोपड़ा ने बताया कि तीन महीने पहले उसके बेटे और दोस्त की हादसे में मौत हो गई थी। घटना की शिकायत पुलिस को दी थी लेकिन पुलिस ने बयानों के आधार पर बनती धारा नहीं लगाई। जब हादसा हुआ तो गाड़ी चालक और उसके दोस्त के पास हथियार थे और सभी नशे की हालत थे। उन्होंने जातिसूचक शब्द बोल गाड़ी भगाने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।

Edited By: Jagran