संस, लुधियाना : वर्तमान गच्छाधिपति श्रृतभास्कर जैनाचार्य विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वर महाराज सा. के शुभाआशीर्वाद व प्रवर्तिनी साध्वी अभय महाराज सा. की सुशिष्या साध्वी कल्पज्ञा म. सा. ठाणा-6 के सानिध्य में श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर प्रांगण में चातुर्मासिक सभा का आयोजन जारी है। इस अवसर पर साध्वी कल्पज्ञा महाराज ने तप की महिमा का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि तप दो प्रकार के है। अनुशन:- चारों प्रकार के आहारों का त्याग करने को अनशन तप कहते है। उनोदरी :- भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए। वृति संक्षेप:- दिन में कम से कम चीजें खाना। खाने की चीजों पर नियंत्रण करना। रस त्याग:- स्वादिष्ट वस्तुओं का त्याग। चार विगृह मदिरा, मास, मक्खन, शहद होते है। विगृहि वस्तुओं का त्याग जैसे दूध, घी, दही, गुड, शक्कर आदि हमें आवश्य करना चाहिए। जैन श्रावक श्राविका को होटल में नहीं जाना चाहिए। काया कलेश :- लोच सरवाना जैसे चीजों को करवाना अपनी काया को तकलीफ देना। धर्म के माध्यम से हम चारों गतियों को प्राप्त कर सकते है। हमारे संस्कार हमारे साथ अगले जन्म में हमारे साथ जाते है। श्रेनिक महाराजा की कहानी दिशा परिमान:- कम से कम जगह में रहना। इस अवसर पर भूषण जैन , रमेश जैन स्वास्तिक, सिकदर लाल जैन, अशोक जैन एसआर, विपन जैन स्वास्तिक, विशाल जैन, डिपंल जैन आदि शामिल थे।

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