रांची, राज्य ब्यूरो। Lohar Caste Is Not ST Status झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में झारखंड में लोहार जाति से एसटी से बाहर करते हुए ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के आदेश को सही मानते हुए एसटी में शामिल करने की प्रार्थी की दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकार का निर्णय बिल्कुल सही है। इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है, इसलिए प्रार्थी की याचिका खारिज की जाती है।

2013 में लोहार जाति एसटी से किया गया था बाहर

अदालत ने झारखंड सरकार के उस फैसले को भी सही बताया है कि जिसमें 13 अगस्त 2019 में लोहार जाति को एसटी की श्रेणी से बाहर करते हुए ओबीसी में शामिल किया गया है। इस आदेश के खिलाफ दशरथ प्रसाद शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान कहा गया कि झारखंड सरकार ने लोहार जाति को एसटी की श्रेणी से अलग करते हुए ओबीसी में शामिल कर दिया है। पहले लोहार जाति एसटी श्रेणी में थी। सरकार का यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। सरकार के आदेश को निरस्त कर देना चाहिए।

अदालत में सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया

सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और आशीष कुमार ठाकुर ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार का निर्णय बिल्कुल सही है। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में अदालत को स्पष्ट किया गया। इसमें कहा गया है कि पहले लोहरा जाति एसटी श्रेणी में थी। कुछ समय बाद लोहारा बन गया। हिंदी में भी लिखने की वजह से लोहार जाति एसटी में शामिल हो गया। इससे पूरी समस्या उत्पन्न हो गई थी। लोहार जाति को एसटी कैटेगरी का दर्जा दिया जाना सही नहीं था। अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए प्रार्थी की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में माना कि लोहार जाति ओबीसी श्रेणी में शामिल माने जाएंगे।

Edited By: M Ekhlaque

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