किशोर जोशी, नैनीताल : नैनीताल (Nainital) की सबसे ऊंची चोटी नयना पीक यानी चायना पीक (China Peak nainital) पर लगातार पर्यटकों की आमद बढ़ रही है। एडवेंचर प्रेमी और नेचर लवर लगातार यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां की पहाड़ियों पर रह रहकर हो रहा भूस्खलन बड़े खतरे का संकेत दे रहे है।

किलबरी रोड पर वन विभाग की चौकी से तीन किलोमीटर में पथरीले उबड़ खाबड़ रास्ते पर पैदल खड़ी चढ़ाई पार कर 8822 फिट ऊंचाई पर स्थित है नयना पीक चोटी। जहां से पंचाचूली, नानकमत्ता, हल्द्वानी, बेतालघाट की खूबसूरती को निहारा जा सकता है।

नयना पीक चोटी से नैनीताल झील का विहंगम दृश्य बेहद आकर्षक होता है। जिसे कैमरे में कैद करने के लिए ही पर्यटक लालायित रहते हैं। चोटी में बादलों का आना जाना लगा रहता है, जो नजारों को और दिलकश बना देता है।

चोटी पर कम नहीं हैं खतरे

नयना पीक चोटी में खतरा कम नहीं है। चोटी से नैनीताल के विहंगम दृश्य के साथ सेल्फी व फोटोग्राफी कर पर्यटक रोमांचित हो उठते हैं लेकिन यहां जरा सी असावधानी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

चोटी के नीचे चट्टान के साथ ही बड़ी खाई है। यहां पहाड़ी से लगातार मिट्टी पत्थर गिरते रहते हैं। एक अदद तारबाड़ तक सुरक्षा के लिए नहीं लगाई गई है। पर्यटकों को खाई में उतरने पर रोक टोक करने वाला कोई नहीं होता।

डेढ़ किमी दूर से पानी का इंतजाम

नयना पीक चोटी में वन विभाग की 1916 में बनी चौकी है,जिसमें वायरलैस सेंटर चलता है। चौकी में वन कर्मचारी की तैनाती रहती है, उसे डेढ़ किलोमीटर दूर हरियाल गांव से ऊपर से पीने का पानी लाना पड़ता है।

वन विभाग के चौकी में तैनात दैनिक आपरेटर राजेंद्र सिंह बोहरा के अनुसार बरसात का पानी एकत्र करने के लिए छत से पाइप टंकी में लगाया गया है,लेकिन पीने का पानी डेढ़ किमी दूर से लाया जाता है। शौचालय की सुविधा भी नहीं है, जंगल में खुले में शौच करने जाना पड़ता है।

नैना देवी हिमालयन पक्षी संरक्षण रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत स्थित नयना पीक में पिकनिक मनाना, कैंपिंग, प्लास्टिक कूड़ा करकट फैलाना, आग लगाना, इलेक्ट्रानिक संगीत बजाना, शस्त्र ले जाना, ड्रोन उड़ाना आदि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है, का बोर्ड लगाया गया है।

अद्दभुत है जैव विविधता

नयना पीक तक ट्रेकिंग के दौरान चारों ओर दूर दूर तक का घने जंगल बरबस ही पर्यटकों व प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। ओक प्रजाति के पेड़ों के अलावा बुरांश, देवदार समेत झाडि्यां वन्य जीवों के बसेरा होने का संकेत देते हैं।

कर्मचारी बोरा के अनुसार चोटी के आसपास घुरड़ काकड़ के झुंड अक्सर आते हैं, जबकि गुलदार भी आता रहता है। भू वैज्ञानिक प्रो सीसी पंत के अनुसार नयना पीक का क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यहां की पहाड़ी से पूर्व में भी बड़ा भूस्खलन हुआ है, पहाड़ी का ट्रीटमेंट होना चाहिए।

कमिश्नर कुमाऊं दीपक रावत ने बताया कि नयना पीक में शौचालय समेत अन्य समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की जाएगी। चोटी पर हादसा ना हो, इसके लिए सुरक्षात्मक उपाय किया जाएंगे।

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Edited By: Skand Shukla