संसू.,बड़हिया (लखीसराय) : सूर्य का सिंह राशि में गुरुवार की रात को सौर मास के तहत प्रवेश हो रहा है। सूर्य 17 सितंबर तक वहां पर रहेंगे। यह समय स्वास्थ्य एवं शक्ति संचयन के लिए काफी महत्वपूर्ण है। सिंह राशि में सूर्य स्वगृही रहते हैं जिसका मानवीय जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है। बड़हिया नगर की वार्ड संख्या 24 चुहरचक के संस्कृत शिक्षक सह ज्योतिषी पीयूष कुमार झा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भादो महीने में प्रतिवर्ष सिंह की संक्रांति व मघा नक्षत्र के संयोग का समय सूर्योपासना का अमृत काल माना जाता है। मघा नक्षत्र व सिंह राशि के एक साथ में सूर्य में प्रवेश को सिंह संक्रांति के नाम से जानते हैं। इस समय में सूर्य की किरणें काफी तीखी हो जाती हैं जिसके फलस्वरूप मानवीय स्वास्थ्य व पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ता है। सिंह संक्रांति में स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए रविवार के दिन महिलाओं को एकांत व्रत करना चाहिए। इसमें केवल एक वक्त फलाहार कर सूर्य की पूजा कनी चाहिए। सूर्य सौर मंडल का मुखिया हैं और इसी के प्रकाश से सारे ग्रह प्रकाशित होते हैं। इस समय सूर्य की तीखी किरणों से बचना चाहिए। भगवान सूर्य की सही तरीके से आराधना व शुद्ध खानपान से हम निरोग रह सकते हैं। सिंह राशि का सूर्य मनुष्य को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ व निरोगिता प्रदान करता है। सिंह की संक्रांति में ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था जो कि सोलह कलाओं में निपुण थे। सिंह संक्रांति में ही महा रविवार का व्रत किया जाता है जिसमें नमक खाना पूर्णतया निषेध रहता है। भगवान सूर्य को प्रसन्न करने व स्वस्थ रहने के लिए इस समय सूर्य नमस्कार व्यायाम, सूर्य भेदी प्रणायाम, आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ, रविवार को नमक नहीं खाना, आक के पेड़ का संरक्षण,आक की लकड़ी का हवन काफी श्रेयस्कर है। इस समय दही, इमली व अन्य मसालेदार भोजन से बचना चाहिए नहीं तो ऐसे समय में लंबी बीमारी का सामना करना पड़ता है। शक्ति संचयन के लिए सिंह की संक्रांति काफी महत्वपूर्ण है।

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