राज्य ब्यूरो, कोलकाता। श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (एसएमपी), कोलकाता के अध्यक्ष विनीत कुमार ने मल्टी-माडल परिवहन पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल देते हुए गुरुवार को कहा कि पीपीपी माडल को शामिल कर नौवहन सेवाओं में रास्ते तलाशने की आवश्यकता है। फेडरेशन आफ इंडियन चेम्बर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से एसएमपी कोलकाता में 17- 18 अगस्त को आयोजित मैरीटाइम पीपीपी कान्क्लेव के समापन सत्र में बोलते हुए उन्होंने पत्तन की भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।

कुमार ने कहा कि कोलकाता में हमने पहले ही खिदिरपुर डाक (केपीडी) के लिए रियायत दी है, जो 180 करोड़ रुपये की है और यह मुख्य रूप से आइडब्ल्यूडी परिवहन के लिए है। उन्होंने कहा कि अब हम खिदिरपुर डाक में भी कंटेनरों को संभालने में सक्षम होंगे। 300 करोड़ रुपये की एक और रियायत हल्दिया डाक काम्प्लेक्स में बर्थ नंबर दो के लिए दी गई है। उन्होंने कहा कि आगामी 2024 में नेताजी सुभाष गोदी में हमारी रियायतें समाप्त हो रही हैं और हम पहले चरण में एक साथ चार बर्थ और दूसरे चरण में बाहरी टर्मिनल और बर्थ नंबर दो और तीन लेने का इरादा रखते हैं। इससे एनएसडी का पूरा संचालन पीपीपी मोड पर होगा।

विस्तार की योजनाओं पर बोलते हुए कुमार ने कहा कि बालागढ़ में 400 करोड़ की लागत से गेट सुविधा का विस्तार करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि कंटेनरों और अन्य सामग्रियों के परिवहन के लिए जेट्टी विकसित करने की योजना हैं और इस बंदरगाह के संकुलन को कम करने के लिए पहले चरण में दो जेट्टियों को विकसित कर रहे हैं। इसके साथ ही कंटेनरों के ट्रांसशिपमेंट के लिए फ्लोटिंग क्रेन सुविधा स्थापित करने की विस्तार योजना भी है। हम कंटेनर के ट्रांसशिपमेंट के लिए डायमंड हार्बर और सागर में 15 साल की रियायत के साथ 75 करोड़ की लागत से फ्लोटिंग क्रेन तैनात करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि 750 करोड़ रुपये के निवेश के साथ तीन परियोजनाएं चल रही है और आगामी तीन-चार वर्षों में एसएमपी, कोलकाता में 2,500 करोड़ रुपये की निवेश की जानी है।

उन्होंने कहा कि हम बेहतर निकासी के लिए हुगली नदी के नीचे एक सुरंग विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं और हम इसके लिए निजी निवेशकों को भी आमंत्रित करेंगे। कुमार ने कहा कि हम बंदरगाह क्षेत्र में पीपीपी की रजत जयंती मना रहे हैं और पीपीपी माडल के तहत बंदरगाह क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। यह बंदरगाह क्षेत्र की कुल क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, अगले सात-आठ वर्षों में लगभग 28,000 करोड़ की निवेश योजना है और यह नौवहन और बंदरगाह क्षेत्र के लिए एक मजबूत कदम है। दो दिवसीय इस कान्क्लेव में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय बंद्योपाध्याय, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मधु एस नायर, पत्तन, पोत-परिवहन व जलमार्ग मंत्रालय के पूर्व सचिव एवं क्रास बार्डर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी प्रोग्राम, यूएसएआईडी के प्रधान कार्यक्रम सलाहकार गोपाल कृष्ण, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पूर्व विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार शंभू सिंह, पत्तन और नौवहन परिवहन अवसंरचना संबंधी फिक्की की समिति के अध्यक्ष धु्रव कोटक, एचडीसी के उपाध्यक्ष एके मेहरा व सम्राट राही व अन्य हस्तियां ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे। 

Edited By: Priti Jha