जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ :

क्षेत्र में जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर लोगों की तैयारियां चल रही हैं। लड्डू गोपाल को सजाने के लिए वीरवार को आवश्यक सामान की खरीददारी को महिलाओं की बाजारों में दिनभर भीड़ लगी रही। उधर, जन्माष्टमी को लेकर नाहरा-नाहरी रोड स्थित इस्कान मंदिर में भव्य कार्यक्रम होगा। राजभोग आरती के साथ-साथ मध्यरात्रि को महा आरती व भोग प्रसाद होगा। मंदिर में यह कार्यक्रम दिनभर चलेगा। वहीं शहर के पुराने मुरली मनोहर मंदिर में भी राधा-कृष्ण की मूर्तियों को सजा दिया गया है। मंदिर में भी सजावट की गई है। यहां भी जन्माष्टमी को लेकर भव्य कार्यक्रम होगा। इस्कान मंदिर में जन्माष्टमी पर होगा भव्य कार्यक्रम:

इस्कान मंदिर के प्रमुख नित्यानंद आश्रय दास ने बताया कि मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भव्य कार्यक्रम होगा। सुबह साढ़े चार बजे मंगल आरती दर्शन होंगे। सुबह आठ बजे भगवान कृष्ण और जन्माष्टमी की महिमा पर प्रवचन होगा। सुबह नौ बजे श्रृंगार दर्शन होंगे। सुबह 10 बजे आनलाइन आरती शुरू होगी। साढ़े 12 बजे राज भोग आरती होगी। शाम सात बजे संध्या आरती होगी। रात 11 बजे भगवान का महाभिषेक होगा। 12 बजे मध्यरात्रि महा आरती और भोग प्रसाद होगा। ये सभी कार्यक्रम इस्कान मंदिर के यू ट्यूब चैनल पर दिनभर लाइव होंगे। बाजारों में लगी रही भीड़:

शहर के मेन बाजार व रेलवे रोड पर इस पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कान्हा के जन्मदिन पर लड्डू गोपाल को सजाने संवारने के लिए श्रद्धालुओं ने बाजार में वस्त्र, बांसुरी, पालना, मालाएं और मुकुट आदि लिया। इस दौरान किसी ने पालना लिया तो किसी ने रंग-बिरंगी पोशाक पसंद की। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा को सजाने संवारने के लिए दिनभर दुकानों पर लोगों भीड़ रही। कान्हा के परिधान, बांसुरी, माला, मुकुट और पालना आदि लेने के लिए दुकानों पर महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने बाल-गोपाल के रूप को निखारने के लिए एक से बढ़कर एक पोशाक पसंद की। कान्हा को सजाने के लिए लाल, नीली, काली, सुनहरी और चमकदार पोशाक खूब पसंद की गईं।

मुकुट, बांसुरी, फूलों एवं मोतियों की मालाएं, लटकन आदि ली गई। कान्हा को झुलाने के लिए पालनों की भी खूब मांग रही। बाजार में आई सविता और मनीषा ने बताया उन्होंने लड्डू गोपाल के लिए सुंदर आकर्षक ड्रेस पसंद की। इसके अलावा पटका, मुकुट, बांसुरी, मालाएं आदि भी ली हैं।

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