कालम -स्वतंत्रता के सारथी

---

सांस्कृतिक मूल्यों का अधिकार

फोटो 13 जमुई 3

संवाद सहयोगी जमुई : आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज से 75 वर्ष पूर्व हमने गुलामी की दास्तां से मुक्त होकर अपनी संस्कृति एवं सांस्कृतिक मूल्यों को आदर्श मानते हुए नए राष्ट्र के निर्माण की ओर अग्रसर हुए थे। किसी भी देश की संस्कृति एवं साहित्य उस देश के नागरिकों को विशिष्ट पहचान दिलाती है। अन्य अधिकारों की तरह सांस्कृतिक मूल्यों का अधिकार भी संविधान प्रदत्त है।

किसी भी देश के लोगों को एक बेहतर नागरिक बनाने का श्रेय वहां की संस्कृति एवं साहित्य को जाता है। आधुनिकता की चकाचौंध में आज भले ही सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा हो पर हमें अपनी सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सजग एवं जिम्मेदार होना ही होगा। हमारी संस्कृति ही हमें एक विशिष्ट नागरिक का दर्जा देते हुए विकास की राह पर ले जाती है। बदलते परिवेश में संस्कृति एवं परंपरा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों पर भी अतिक्रमण जारी है। जिले में सांस्कृतिक मूल्यों के अधिकार को संरक्षण और संव‌र्द्धन की दिशा में कई समाजसेवियों ने अपना योगदान दिया है। ऐसे ही हैं भवानंद, जो सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को लेकर संकल्पित हैं। इनके प्रयास से जिले में सांस्कृतिक मूल्यों के अधिकार को नई पहचान मिल रही है। वे कई वर्षों से सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को लेकर जागरूक करने के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में उतारने की सीख देते आ रहे हैं। सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को लेकर कार्यक्रमों के माध्यम से आम लोगों को सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनका मानना है कि हमारी संस्कृति वास्तव में जीवन जीने की एक शैली है। जिसे देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति एवं सांस्कृतिक मूल्यों से अंदाजा लगाया जा सकता है। आधुनिकता की चकाचौंध में दिन प्रतिदिन हो रहे सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास आज पूरे देश के लिए एक चिता का विषय है। संस्कृति एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण को लेकर विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढि़यों के बीच हमारी संस्कृति कायम रह सके।

Edited By: Jagran