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ITR भरते समय विदेश में संपत्ति और आय की जानकारी देना क्यों है जरूरी? समझें नियम और जुर्माना

Published: Sun, 05 Jul 2026 07:52 AM (IST)

आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें करदाताओं को विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी देना अनिवार्य है।

विदेश में संपत्ति की आयकर रिटर्न में जरूर दें जानकारी

विदेश में संपत्ति की आयकर रिटर्न में जरूर दें जानकारी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आइटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभी प्रकार के करदाता अपनी पिछले वित्त वर्ष की आय के लिए आइटीआर दाखिल कर सकते हैं।

आयकर विभाग लगातार कहता रहता है कि करदाता आइटीआर में अपनी सभी प्रकार की आय की जानकारी अवश्य दें। ऐसा न करने पर करदाताओं पर जुर्माना लगाया जा सकता है। मनोज कुमार बता रहे हैं कि विदेश में संपत्ति को लेकर क्या कहते हैं आयकर कानून और इनकी जानकारी न देने पर क्या है जुर्माने का प्रविधान...

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आइटीआर के लिए कौन सा फार्म भरना होगा

विदेश में आय अर्जित करने वाले या संपत्ति रखने वाले रेजिडेंट या आर्डिनरीली रेजिडेंट (आरओआर) को रिटर्न दाखिल करने के लिए आइटीआर-2 फार्म का इस्तेमाल करना होगा।

हालांकि, उनके पास कारोबार या पेशे से कोई आय नहीं होनी चाहिए। ऐसे करदाताओं को 'शेड्यूल एफए' के जरिये विदेशी संपत्ति की जानकारी रखनी होगी। जिन लोगों के पास विदेश में संपत्ति है और उन्हें बिजनेस या पेशे से भी आय होती है, उन्हें आइटीआर-3 के जरिये रिटर्न दाखिल करना चाहिए।

10 लाख रुपये का जुर्माना विदेशी संपत्ति की जानकारी नहीं देने पर

जरूरी है विदेशी संपत्ति की जानकारी देना

कालेधन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और टैक्स लगाने से जुड़े कानून (बीएमए) जैसे टैक्स चोरी रोकने वाले कड़े कानूनों की वजह से विदेशी संपत्ति की जानकारी देना जरूरी है। करदाताओं को रिटर्न जमा करने से पहले अपने वित्तीय रिकार्ड का मिलान करना चाहिए। सावधानी से जानकारी देने से नोटिस, जुर्माना और लंबी जांच-पड़ताल से बचा जा सकता है।

दोहरे कर से बचने के लिए करें एफटीसी दावा

विदेश में संपत्ति रखने वाले करदाताओं को दोहरे कर से बचने के लिए फारेन टैक्स क्रेडिट (एफटीसी) दावा करना चाहिए। हालांकि, ऐसे मामलों में राहत और उसकी मात्रा भारत की ओर से किए गए दोहरे कर बचाव समझौते (डीटीएए) के नियमों या जहां डीटीएए नहीं है, वहां एकतरफा राहत से जुड़े नियमों पर निर्भर करती है।

itr filing

विदेशी आय को आइटीआर-2 की संबंधित अनुसूचियों में बताना चाहिए और योग्य विदेशी टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए चुकाए गए विदेशी टैक्स की जानकारी अनुसूची (टैक्स रिलीफ) में देनी चाहिए।

विदेशी संपत्ति को लेकर क्या कहता है कानून

आयकर नियमों के अनुसार, भारत में रहने वाले लोगों को अपने आइटी आर में विदेशी आय और विदेशी संपत्ति की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। इस में विदेशी बैंक खाते, शेयर, विदेशी सेवानिवृत्ति खाता, एंप्लाई स्टाक ओनरशिप प्लान (ईएसओपी) शामिल हैं।

यदि करदाता ऐसी संपत्ति की जानकारी देने में कोई चूक करता है, भले ही उस पर कोई टैक्स नहीं बनता, तब भी 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

भारत में आइटीआर में दी जाने वाली जानकारी आमतौर पर अप्रैल से मार्च अवधि के दौरान आय से जुड़ी होती है। लेकिन विदेशी संपत्ति की जानकारी कैलेंडर वर्ष के हिसाब से देनी होती है। इसका कारण यह है कि ज्यादातर दूसरे देश कैलेंडर वर्ष का पालन करते हैं।

आकलन वर्ष 2026-27 के आइटीआर में जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक की आय या संपत्ति जानकारी देनी होगी।

जागरण इन्फो