मोतिहारी। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस माह में भगवान विष्णु की खास पूजा करनी चाहिए। इस बर्ष जन्माष्टमी पर 18 अगस्त को अष्टमी तिथि रात्रि 12:14 बजे प्रारंभ हो जाएगी जो 19 अगस्त को रात्रि 01:06 बजे तक रहेगी। उक्त समय कृतिका नक्षत्र का योग रहेगा जो रात्रि 4:58 तक है। इसमें गृहस्थाश्रम सहित समस्त जनों के लिए 19 अगस्त शुक्रवार को अर्ध रात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत करना श्रेयस्कर होगा। उसके बाद रोहिणी नक्षत्र 19 को रात्रि 4:59 से रहेगा, जो 20 अगस्त तक रहेगा, यह वैष्णवजन हेतु 20 अगस्त शनिवार को रोहिणी नक्षत्र युक्त व्रत श्रेयस्कर है। उक्त जानकारी चकिया प्रखंड परसौनी खेम स्थित महर्षि गौतम ज्योतिष परामर्श एवं अनुसंधान केंद्र चंपारण काशी के आचार्य अभिषेक कुमार दूबे, आचार्य आशुतोष कुमार द्विवेदी, आचार्य रोहन कुमार पाण्डेय ने संयुक्त रूप से दी। कहा कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक कर पंचामृत अर्पित करना चाहिए। माखन मिश्री का भोग लगाएं। हर बार की तरह इस बार भी जन्माष्टमी दो दिन मनाई जा रही है। 19 और 20 अगस्त दोनों दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। 19 अगस्त शुक्रवार को स्मार्थ गृहस्थों के लिए एवं वैष्णों मतानुयायी श्रीकृष्णजन्माष्टमी का व्रत 20 अगस्त शनिवार को करेंगे। इस वर्ष प्रथम दिन अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र का संयोग ना होने से अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि को ही प्रधानता दी जाएगी। 19 अगस्त शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी होगा । दो दिन की होती है जन्माष्टमी

भारत में लोग अलग-अलग तरह से जन्माष्टमी मानते हैं। वर्तमान समय में जन्माष्टमी को दो दिन मनाया जाता है, पहले दिन दैनिक दिनचर्या वाले लोग जन्माष्टमी मानते हैं। अगले दिन रोहिणी नक्षत्र में साधू-संत जन्माष्टमी मानते हैं। मंदिरों में साधू-संत झूम-झूम कर श्री कृष्ण की अराधना करते हैं। इस दिन साधुओं का जमावड़ा मंदिरों में होता है।

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