दिल्ली-NCR सहित देशभर के उद्योगों की हीटिंग लागत होगी 34% कम, 67 प्रतिशत तक घटेगा कार्बन उत्सर्जन
आइफारेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक हीटिंग में हीट पंप तकनीक अपनाने से ईंधन लागत में 34% और उत्सर्जन में ...और पढ़ें

उद्योगों की हीटिंग लागत होगी 34 प्रतिशत कम। (AI Generated Image)
HighLights
औद्योगिक हीटिंग में 34% ईंधन लागत की बचत संभव।
फैक्ट्रियों से 67% तक औद्योगिक उत्सर्जन घटेगा।
हीट पंप पारंपरिक हीटर से 2-6 गुना अधिक ऊर्जा कुशल।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। आइफारेस्ट (इंटरनेशनल फोरम फार एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलाजी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एवं एनसीआर सहित देशभर के औद्योगिक हीटिंग क्षेत्र में हीट पंप तकनीक को अपनाकर ईंधन की लागत में 34 प्रतिशत तक बचत की जा सकती है।
यह तकनीक फैक्ट्रियों से निकलने वाले औद्योगिक उत्सर्जन को भी 67 प्रतिशत टन तक घटाने में सक्षम है। एसी की विपरीत तकनीक पर काम करने वाला हीट पंप बहुत किफायती है, जो साधारण हीटर के मुकाबले दो से छह गुना अधिक ऊर्जा देता है।
'भारत में हीट पंप के बेहतर उपयोग के लिए नीति रोडमैप' शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक यदि भारतीय उद्योग इस तकनीक को अपनाते हैं, तो कारखानों में चीजों को गर्म करने (हीटिंग) का खर्च एक तिहाई कम हो जाएगा। साथ ही, इससे हर साल 2.44 करोड़ टन कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन रूकेगा।
यह रिपोर्ट दिल्ली और एनसीआर के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां गर्मियों में बढ़ता तापमान एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एनसीआर के कपड़ा, आटोमोटिव, बेकरी और फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों में हीट पंप का इस्तेमाल थर्मल हाट स्पाट (अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्रों) को घटाने में भी सहायक हो सकता है।
क्या होता है हीट पंप?
जैसे एसी अंदर की गर्मी को खींचकर बाहर फेंक देता है और अंदर ठंडक करता है, हीट पंप बिल्कुल इसके विपरीत काम करता है। यह मशीन अपने आसपास की हवा, पानी या फैक्ट्रियों से निकलने वाली वेस्ट हीट से गर्मी को सोखती है और फिर उसे कंप्रेस करके (दबाव बनाकर) और ज्यादा गर्म कर देती है।
क्यों है यह खास?
पारंपरिक हीटर, बायलर या इलेक्ट्रिक गीजर बिजली या कोयला/ डीजल जलाकर सीधे गर्मी पैदा करते हैं, जिससे खर्च व प्रदूषण दोनों ज्यादा होते हैं। वहीं, हीट पंप गर्मी पैदा नहीं करता, बल्कि बाहर की गर्मी को अंदर ट्रांसफर करता है।
इसे अपनाने से बचत भी बड़ी
जहां साधारण इलेक्ट्रिक हीटर एक यूनिट बिजली से सिर्फ एक यूनिट गर्मी देता है, वहीं हीट पंप उतनी ही बिजली में दो से छह गुना (200 से 600 प्रतिशत दक्षता) तक ज्यादा गर्मी पैदा कर देता है।
दिल्ली और एनसीआर के उद्योगों के लिए क्यों है जरूरी?
दिल्ली और आसपास के औद्योगिक इलाकों (जैसे नरेला, बवाना, ओखला) में भारी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हैं। इन कारखानों में ज्यादातर काम कम तापमान वाली हीटिंग का होता है। इसके लिए हीट पंप सबसे सटीक एवं सस्ता उपाय हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेयरी, पेय पदार्थ (बेवरेज), आटोमोटिव और उपभोक्ता सामान बनाने वाले उद्योगों में हीट पंप लगाने का खर्च बिना किसी सरकारी सब्सिडी के मात्र एक से दो साल में वसूल हो जाता है। बाकी उद्योगों में भी यह खर्च अधिकतम पांच साल में निकल आता है, जो इसकी व्यावसायिक सफलता को दिखाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक दूध को पाश्चुरीकृत और गर्म करने में हीट पंप का इस्तेमाल करने से हीटिंग की लागत में 53.5 प्रतिशत की सीधी बचत होती है। इसके अलावा, दिल्ली जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में गर्म पानी के लिए इसका इस्तेमाल बिजली बिल को भारी मात्रा में कम कर सकता है।
