कानपुर,  जागरण संवाददाता। कृषि भूमि को आवासीय में बदलने और फिर उसे कृषि भूमि करने के मामले में गुरुवार को 22 प्रकरण डीएम के सामने रखे गए। इनमें से 17 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है जबकि पांच मामलों में दो दिनों के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश जिलाधिकारी ने दिए हैं। उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट आने के बाद एक आइएएस व तीन पीसीएस अफसरों की गर्दन फंसना तय है।

जिले की चारों तहसीलों में वर्ष 2012-14 के बीच में हुए भूपरिवर्तन को लेकर जांच शुरू हुई तो 20 प्रकरण सामने आए थे। यह जांच कृषि भूमि से आवासीय और फिर कृषि भूमि की अनुमति देने से जुड़ी थी। एक जुलाई 2012 से 30 जून 2014 तक दो वर्षों के बीच नर्वल, सचेंडी, बगदौधी कछार, सिंहपुर कछार, खेरसा, होरा कछार, बूढ़पुर मछरिया, परगही कछार और घाटमपुर की कृषि भूमि को आवासीय में बदला गया था। इसके बाद जिले में पिछले पांच साल के रिकार्ड खंगाले गए।

इसमें 22 ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें कृषि भूमि का प्रयोग बार-बार बदला गया। जांच के लिए सभी एडीएम को लगाया गया था। गुरुवार को जिलाधिकारी ने सभी एडीएम के साथ समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि 17 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है। किन अधिकारियों ने इसकी अनुमति दी यह भी तय किया जाना है। 22 अगस्त को मंडलायुक्त के समक्ष यह रिपोर्ट रखी जानी है। बता दें कि लोकायुक्त के यहां दाखिल एक परिवाद के बाद ऐसे मामलों की जांच के आदेश शासन ने दिए थे जिस पर जांच की जा रही है। 

इन बिंदुओं पर हुई है जांच 

-राजस्व अभिलेखों के आधार पर पूछताछ कर और सेटेलाइट इमेज के आधार पर स्थलीय जांच 

-वर्तमान में वह कृषि भूमि है अथवा नहीं

-कृषि भूमि घोषित होने के बाद कितनी जमीनों का कितने समय बाद क्रय विक्रय किया गया 

- समीक्षा में 22 प्रकरण सामने आए हैं। कुछ मामलों की जांच अभी पूरी होनी है जिसके निर्देश दिए गए हैं। समग्र रिपोर्ट आने के बाद मंडलायुक्त को सौंपा जाएगा। -डा. राज शेखर, मंडलायुक्त

Edited By: Abhishek Verma