कोलकाता, जयकृष्ण वाजपेयी। शिक्षक भर्ती घोटाले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कैबिनेट में नंबर दो मंत्री और तृणमूल कांग्रेस में महत्वपूर्ण पद पर रहे पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी को लेकर पार्टी में चुप्पी थी। परंतु जैसे ही मवेशी तस्करी मामले में पार्टी की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य व बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी हुई तो तृणमूल नेताओं की बेचैनी बढ़ गई। इसी का नतीजा रहा कि राज्यभर में तृणमूल की ओर से दो दिनों तक विरोध-प्रदर्शन किए गए। इस मुद्दे पर जिस तरह का व्याकुल शोर व्याप्त है, उसमें निहितार्थ हर कोई समझ रहा है। अनुब्रत की गिरफ्तारी के बाद ममता से लेकर तृणमूल के सांसदों, विधायकों और नेताओं की ओर से बेचैनी जिस तरह से धमकी के रूप में अभिव्यक्त हो रही है, वह बहुत कुछ कह रही है। ऐसा नहीं है कि लोग नहीं समझ रहे हैं कि इस बौखलाहट के पीछे क्या है?

वैसे तो मोदी सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ बयानबाजी आम थी, लेकिन पहली बार देखा जा रहा है कि विरोधी दलों की आलोचना से सत्तारूढ़ दल की व्याकुलता इतनी बढ़ चुकी है कि नेता से लेकर सांसद, विधायक तक धमकी देने लगे हैं। अगर सत्तारूढ़ दल के सांसद-विधायक धमकाने लगें तो स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है।

दरअसल, ममता के 11 वर्षो के शासनकाल में यह पहली बार है, जब तृणमूल नेता और मंत्री के मुंह पर लोग ‘चोर’ कहने लगे हैं। पार्थ पर तो एक महिला ने चप्पल तक फेंकी थी। यह सब देखकर तृणमूल के नेताओं, सांसदों, विधायकों की कुंठा धमकी के रूप में बाहर आ रही है। तृणमूल के वरिष्ठ लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी, सौगत राय, विधायक मदन मित्र, असित मजूमदार समेत कई नेता भाजपा, माकपा और कांग्रेस को सरेआम धमकियां दे रहे हैं। शनिवार को हुगली में तृणमूल के विरोध-प्रदर्शन के दौरान तृणमूल के स्थानीय विधायक असित मजूमदार ने कहा, ‘अभिषेक (ममता के भतीजे) के नाम पर दुष्प्रचार होगा तो धुलाई और पिटाई होगी।’ वहीं सांसद कल्याण बनर्जी ने भाजपा और माकपा पर हमला बोलते हुए कहा, ‘ममता दीदी ने गलती की है। उनकी (ममता) आलोचना करना सही नहीं है, लेकिन मुङो अब ऐसा लग रहा है कि ममता दीदी ने ‘बदला नहीं, बदलाव चाहिए’ का जो नारा दिया था, उसे बदलकर अब ‘बदलाव नहीं, बदला होना चाहिए’ था। मुङो माफ कर दीजिए दीदी, मैंने यह कहा है, क्योंकि मैं आपके जैसी बड़ी सोच वाला नहीं हूं। आपका दिल बड़ा है, लेकिन विरोधियों में आपकी मानसिकता को समझने की क्षमता नहीं है। भाजपा, माकपा और कांग्रेस जिस तरह का गंदा काम कर रहे हैं, हमें कहना चाहिए था कि बदलाव नहीं बदला लेना चाहिए।’

वहीं तृणमूल विधायक मदन मित्र ने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष को धमकी देते हुए कहा, ‘ज्यादा ईंट-पत्थर मत चलाओ। कमर में बेल्ट बांधकर चारों ओर घुमाया जाएगा। आलोचकों को लाठी से जवाब दिया जाएगा।’ इससे पहले बीरभूम के एक तृणमूल नेता ने कहा कि अनुब्रत की गिरफ्तारी पर यदि कोई खुशी मनाता है तो उसकी जमकर पिटाई होगी। इसके अगले ही दिन रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र में तृणमूल के सांसद सौगत राय ने कहा कि आलोचकों के चमड़े से जूते बनवाए जाएंगे। जब उनकी आलोचना होने लगी तो उन्होंने सफाई दी कि उनका कहने का तात्पर्य यह नहीं है। वहीं ममता ने अपनी पार्टी के बीरभूम जिलाध्यक्ष की गिरफ्तारी पर रविवार को कहा कि एक अनुब्रत को गिरफ्तार करोगे तो लाखों और हैं।

ऐसे में यह सवाल किया जा रहा है कि क्या अनुब्रत मंडल स्वतंत्रता सेनानी हैं या कोई बड़े समाज सुधारक? उनकी गिरफ्तारी गाय तस्करी में हुई है। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों और विधायकों की धमकी की भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने सौगत राय के बयान पर कहा, ‘लोगों ने उन्हें नारद स्टिंग कांड में रुपये लेते हुए देखा है। यह सब बातें उनके मुंह से निकल रही हैं, जिन्होंने इस तरह का काम किया है। वे भ्रष्टाचार के सागर में डूबे हुए हैं। उन्हें डर है कि कल उनका नाम आ जाएगा।’

[राज्य ब्यूरो प्रमुख, बंगाल]

Edited By: Sanjay Pokhriyal