'सुबह 4 बजे तक चला मंथन', ईरान-सऊदी और UAE जैसे धुर विरोधियों को भारत ने कैसे BRICS के संयुक्त बयान पर राजी किया
भारत ने लंबी बातचीत के बाद ब्रिक्स के संयुक्त बयान पर आम सहमति बनाने में बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है।

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत। (फोटो- पीटीआई।)
HighLights
भारत ने ब्रिक्स संयुक्त बयान पर आम सहमति बनाई।
ईरान, सऊदी अरब, यूएई जैसे देशों में बनी सहमति।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की बड़ी कामयाबी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत हुई है। भारत ने लंबी बातचीत के बाद ब्रिक्स (BRICS) के संयुक्त बयान पर आम सहमति बना ली है। शनिवार को सुबह करीब 4 बजे तक चली बातचीत के बाद आम सहमति बनी।
यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश, जिनके बीच कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर गहरे मतभेद और अलग-अलग रुख हैं, वे सभी इस समूह का हिस्सा हैं।
भारत ने लगातार की बातचीत
पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों और बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अलग-अलग रुख रखने वाले देशों के बीच तालमेल बिठाने और यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार बातचीत की कि मतभेदों की वजह से संयुक्त बयान पर कोई असर न पड़े।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर मतभेद सामने आए और भारत ने अलग-अलग विचारों के बीच तालमेल बिठाने और यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार बातचीत की कि असहमति की वजह से संयुक्त घोषणा-पत्र पर कोई असर न पड़े।
क्यों अहम है ये सहमति?
सरकारी सूत्रों ने बताया, "बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर मतभेद सामने आए। भारत ने अलग-अलग राय रखने वाले सदस्यों के बीच आम सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की। यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक ही मंच का हिस्सा हैं, जबकि कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके बीच गहरे मतभेद और अलग-अलग राय रही है।"
भारत ने अलग-अलग राय रखने वाले सदस्यों के बीच तालमेल बिठाने और ऐसी आम सहमति बनाने की कोशिश की जिसे सभी सदस्य स्वीकार कर सकें। कई घंटों की बातचीत और विचार-विमर्श के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बनी, जिससे पता चलता है कि चर्चा कितनी जटिल थी।
यह कामयाबी तब मिली जब नेता 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में जुटे थे। भारत अपनी अध्यक्षता का इस्तेमाल इस विविध समूह के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए करना चाहता था। सफल बातचीत ने ऐसे मंच को संभालने की चुनौती को भी उजागर किया, जिसमें अब काफी अलग भू-राजनीतिक स्थिति वाले देश एक साथ आते हैं।
ब्रिक्स प्रक्रिया को साझा हितों वाले क्षेत्रों पर केंद्रित रखने की भारत की कोशिशों ने विवादित मुद्दों पर असहमति को संयुक्त बयान में बाधा बनने से रोकने में मदद की। भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें दुनिया के कई प्रमुख नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं।
